Benipur News: बेनीपुर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां धर्म और मानव सेवा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। जीवन हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. आरके झा ने अपनी कांवर यात्रा को केवल शिवभक्ति तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे मानव कल्याण का माध्यम भी बनाया है।
28 अक्टूबर को सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर कांवर यात्रा पर निकले डॉ. झा रास्ते भर साथी कांवरियों की निस्वार्थ सेवा में जुटे हैं, जो उनके त्याग और समर्पण की भावना को उजागर करता है।
डॉ. झा कंधे पर कांवर लेकर शिवभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उनका मन सिर्फ भगवान शिव में ही नहीं, बल्कि मानव सेवा के संकल्प में भी लीन है। उनकी यह पहल धर्म के साथ लोककल्याण का मजबूत संदेश दे रही है।
कांवर यात्रा: त्याग और समर्पण की अनूठी मिसाल
डॉ. आरके झा के अनुसार, कांवर यात्रा सिर्फ भगवान शिव की आराधना का माध्यम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह जीवन में त्याग, समर्पण, सादगी और समानता का
भाव अपनाने की प्रेरणा भी देती है। उनका मानना है कि सच्ची धार्मिक यात्रा तभी सार्थक होती है, जब हम अपने जीवन में ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाकर जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोपरि मानें।
‘धार्मिक यात्रा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब हम अपने जीवन में ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाकर जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोपरि मानेंगे। मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।’
डॉ. झा ने इस बात पर जोर दिया कि भगवान शिव की भक्ति हमें समाज के कल्याण और दूसरों की भलाई (परोपकार) की सीख देती है। उनकी यह यात्रा उनके इस दृढ़ विश्वास को दर्शाती है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
साथी कांवरियों के लिए प्रेरणा बने डॉ. आरके झा
डॉ. आरके झा की इस यात्रा में दर्जनों अन्य कांवरिया भी उनके साथ चल रहे हैं। इनमें पंकज कुमार, कन्हैया चौधरी, दीपक मिश्रा, कृष्णानंद झा और मनोज झा प्रमुख हैं। ये सभी डॉ. झा की प्रेरणा से न केवल अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर रहे हैं, बल्कि उनके मानव सेवा के जज्बे से भी प्रभावित हो रहे हैं। डॉ. झा का यह कदम अन्य तीर्थयात्रियों के लिए भी एक मिसाल बन रहा है कि कैसे धार्मिक अनुष्ठानों को सामाजिक दायित्वों के साथ जोड़ा जा सकता है।
डॉ. आरके झा की यह कांवर यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सशक्त प्रेरणा है। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि सच्ची भक्ति लोककल्याण और परोपकार में निहित है। यह पहल आने वाले समय में अन्य लोगों को भी अपनी धार्मिक यात्राओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे आस्था के साथ-साथ मानवता का भी प्रसार हो।

















