Darbhanga Makhana Hub: मिथिलांचल के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब दरभंगा को देश का मखाना हब बनाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। कुल 18 करोड़ रुपये की लागत से यहां एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एनएबीएल लैब स्थापित की जाएगी। इस कदम से मखाना और जलीय कृषि उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण तथा व्यापारीकरण को एक नई पहचान मिलेगी, जो क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा।
स्थानीय सांसद और लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा किया। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के उद्यान तथा बागवानी निदेशक अभिषेक कुमार और कृषि विभाग के राज्यस्तरीय अधिकारियों के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई है।






दरभंगा क्यों बना मखाना हब के लिए पहली पसंद?
सांसद डॉ. ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए बिहार हेतु 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी के अंतर्गत प्रस्तावित एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए दरभंगा सभी मानकों को पूरा करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दरभंगा में पहले से ही राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र मौजूद है। इसके अलावा, मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण के लिए जरूरी पारंपरिक कौशल, बेहतर सड़क और हवाई संपर्क के साथ अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ भी यहां उपलब्ध हैं, जो इसे एक आदर्श स्थान बनाती हैं।
किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर
डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने निदेशक और अधिकारियों से एनएबीएल प्रयोगशाला और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एक ही स्थान पर स्थापित करने पर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के सेंटर तथा प्रयोगशाला की स्थापना से मखाना के साथ-साथ जल में होने वाले अन्य फलों के उत्पादन, अनुसंधान, गुणवत्ता परीक्षण, कौशल विकास, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा निर्यात गतिविधियों में प्रभावी समन्वय स्थापित होगा।
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा, ‘यह पहल दरभंगा को देश का मखाना हब बनाने के साथ-साथ पूरे मिथिलांचल के किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।’
इस परियोजना के तहत, एनएबीएल लैब के लिए 8 करोड़ रुपये और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 10 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई है। सांसद ने यह भी बताया कि आवश्यकता पड़ने पर राशि में और बढ़ोतरी की जा सकती है। यह कदम क्षेत्र के किसानों की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा प्रोत्साहन देगा।








