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डॉक्टर-मरीज संवाद: एम्स पटना में प्रशिक्षण से बदलेगी स्वास्थ्य सेवा की तस्वीर, जानें कैसे

Patna Health News: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 700 से अधिक चिकित्सा शिक्षकों और पेशेवरों ने भाग लिया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बेहतर संचार से मरीजों का भरोसा बढ़ता है और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता सुधरती है।

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Patna Health News: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) ने हाल ही में पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में स्वास्थ्य सेवा में संचार पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अकादमिक कार्यक्रम का आयोजन किया। 5 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर से 700 से अधिक चिकित्सा शिक्षक, चिकित्सक, स्नातकोत्तर प्रशिक्षु और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर शामिल हुए। ‘सहानुभूति से रोगी सुरक्षा तक: नैदानिक ​​अभ्यास में व्यावसायिक संचार को मजबूत करना’ विषय पर केंद्रित इस पहल का उद्देश्य रोगी सुरक्षा, उपचार के परिणामों और डॉक्टर-रोगी संबंधों को बेहतर बनाने में संचार की भूमिका पर जोर देना था।

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डिप्टी सीएम ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन, बताया महत्व

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में किया, जबकि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात सेठ विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री चौधरी ने प्रभावी संचार और सहानुभूति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इससे स्वास्थ्य सेवा में जनता का विश्वास मजबूत होता है और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार आता है। उन्होंने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में संचार कौशल को एकीकृत करने के लिए NBEMS के प्रयासों की सराहना भी की। डॉ. सेठ ने भी चिकित्सा पेशेवरों के लिए संचार, करुणा और व्यावसायिकता को आवश्यक गुण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा शिक्षा को ऐसे डॉक्टर तैयार करने चाहिए जो नैदानिक ​​विशेषज्ञता के साथ-साथ सार्थक रोगी बातचीत भी कर सकें।

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उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, “प्रभावी संचार और सहानुभूति से स्वास्थ्य सेवा में जनता का विश्वास मजबूत होता है और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार आता है।”

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नैदानिक ​​अभ्यास में संचार पर रहा जोर

यह दिन भर चलने वाला कार्यक्रम रोगी-केंद्रित परामर्श, नैदानिक ​​अभ्यास में सहानुभूति, बुरी खबर साझा करने, संघर्ष समाधान, अंतर-पेशेवर सहयोग और संचार कौशल प्रशिक्षण पर व्याख्यान, पैनल चर्चा और केस-आधारित शिक्षण सत्रों से भरा रहा। आयोजकों के अनुसार, इन सत्रों को स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को दैनिक नैदानिक ​​सेटिंग्स में साक्ष्य-आधारित संचार प्रथाओं को लागू करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा वैज्ञानिक ज्ञान को सहानुभूति और सम्मानजनक संचार के साथ जोड़ने पर निर्भर करती है। उन्होंने रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में सक्षम स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

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NBEMS की पहल के तहत हुआ आयोजन

यह कार्यक्रम NBEMS की उस पहल को दर्शाता है, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवा में संचार को स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का एक मुख्य घटक बनाया जा रहा है। प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. मुक्ता अग्रवाल थीं, जिन्होंने इसकी योजना और समन्वय का कार्य संभाला। NBEMS के अनुसार, यह कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा में संचार को एक व्यावसायिक क्षमता के रूप में मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य भविष्य के स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को नैदानिक ​​कौशल और प्रभावी संचार प्रथाओं दोनों से लैस करना है, ताकि सुरक्षित और अधिक रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण को बढ़ावा मिल सके।

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