Bihar Illegal Hospital: बिहार के मनीगाछी प्रखंड में वर्षों से बिना लाइसेंस चल रहे एक अवैध नर्सिंग होम, मिथिला इमरजेंसी हॉस्पिटल को आखिरकार सिविल सर्जन ने सील कर दिया है। सोमवार को हुई इस कार्रवाई के बाद भी स्थानीय लोगों ने इसे महज खानापूर्ति बताया है। नेहरा पूर्वी पंचायत के नेहरा लुल्हवा चौक स्थित श्याम सहनी के मकान में यह अस्पताल संचालित हो रहा था।
अवैध अस्पताल पर कार्रवाई, एक मौत का मामला
मनीगाछी स्थित मिथिला इमरजेंसी हॉस्पिटल पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। गत वर्ष इसी अस्पताल में जगदीशपुर गांव निवासी और भाजपा नेता बच्चा बाबू सहनी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद लोगों ने जमकर हंगामा किया था।

स्वास्थ्य सेवा के मानकों के विपरीत और बिना किसी अनुज्ञप्ति के यह अवैध नर्सिंग होम वर्षों से धड़ल्ले से चल रहा था। इन शिकायतों के मद्देनजर सोमवार को सिविल सर्जन (सीएस) डॉ. अरुण कुमार ने छापेमारी की और अस्पताल को सील कर दिया।
डॉ. अरुण कुमार ने जांच के बाद कहा, ‘इस संबंध में कानून सम्मत उचित कार्रवाई की जाएगी।’
जनता के सवाल: क्या यह सिर्फ दिखावा है?
अस्पताल को सील करने की इस कार्रवाई को स्थानीय उप मुखिया मनोज चौधरी सहित कई लोगों ने महज खानापूर्ति करार दिया है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने पूरी तरह से अस्पताल को बंद नहीं किया है। लोगों ने बताया कि लैब रूम सहित कई महत्वपूर्ण कमरों को सील नहीं किया गया, सिर्फ तीन कमरों में ताला लगाया गया है।
एक ही इमारत में अवैध नर्सिंग होम और मैरिज हॉल
स्थानीय लोगों ने एक और गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार, जिस मकान में यह अवैध नर्सिंग होम चल रहा है, उसी में एक व्यावसायिक विवाह भवन भी संचालित है। लोगों का कहना है कि इस विवाह भवन में भी कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है, लेकिन प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। इस स्थिति ने स्थानीय निवासियों में सुरक्षा और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद भी, स्थानीय लोगों की आशंकाएं बनी हुई हैं। प्रशासन को अब इन सवालों का जवाब देना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह के अवैध प्रतिष्ठान लोगों के जीवन से खिलवाड़ न कर सकें।








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