Bihar State Planning Board: बिहार की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार को बिहार राज्य योजना पर्षद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस महत्वपूर्ण पद पर उनकी नियुक्ति को राज्य की विकास योजनाओं और नीतिगत निर्णयों पर सीधा असर डालने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। योजना एवं विकास विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
देवेश कुमार अगले तीन वर्षों तक इस पद पर अपनी सेवाएं देंगे। खास बात यह है कि इस जिम्मेदारी के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्राप्त होगा, जिससे सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह नियुक्ति देवेश कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव और भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए की गई है।

बिहार में बड़ा सियासी दांव: पूर्व MLC को मिली मंत्री पद के साथ नई जिम्मेदारी, क्या है BJP का प्लान?
Bihar Planning Board: योजना एवं विकास विभाग द्वारा सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, पूर्व भाजपा एमएलसी देवेश कुमार को बिहार राज्य योजना पर्षद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तीन साल के कार्यकाल के लिए की गई है। देवेश कुमार को उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए मंत्री का दर्जा भी दिया जाएगा, जिससे इस नियुक्ति का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
क्यों अहम है देवेश कुमार की यह नियुक्ति?
देवेश कुमार को मंत्री का दर्जा मिलना उनकी नई भूमिका को और भी प्रभावशाली बनाता है। राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष के रूप में, उनसे बिहार में विकास योजना, सरकारी योजनाओं और नीति-संबंधी मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। भाजपा में उनके संगठनात्मक अनुभव और विधान परिषद में उनके पिछले कार्यकाल को देखते हुए, राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण नई जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है।
दीपक प्रकाश के लिए खाली की थी सीट
देवेश कुमार की यह नियुक्ति उनके बिहार विधान परिषद से इस्तीफे के बाद हुई है। उन्हें 2021 में राज्यपाल कोटे से विधान परिषद के लिए चुना गया था और उनका कार्यकाल अगले साल मार्च तक चलना था। हालांकि, उन्होंने पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद में नामित करने की सुविधा के लिए इस्तीफा दे दिया था। दीपक प्रकाश राज्य विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य न होते हुए भी मंत्री बन गए थे, और मंत्री बने रहने के लिए उन्हें विधानमंडल का सदस्य बनना आवश्यक था।
देवेश कुमार का इस्तीफा एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के अनुरोध पर हुआ था, जिसके बाद दीपक प्रकाश को राज्यपाल कोटे से विधान परिषद सीट मिली। दीपक प्रकाश के नामांकन से जुड़ा यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था।
भाजपा में लंबा अनुभव और नई जिम्मेदारी
देवेश कुमार का भाजपा के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने पार्टी में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाली हैं और वर्तमान में वह भाजपा के मिजोरम राज्य प्रभारी हैं। सक्रिय राजनीति में आने से पहले, उन्होंने विभिन्न मीडिया संगठनों के साथ पत्रकार के रूप में भी काम किया। देवेश स्वतंत्रता सेनानी यमुना कारजी के पोते भी हैं। मंत्री के दर्जे के साथ, देवेश कुमार बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में एक सक्रिय भूमिका में लौट रहे हैं, जो राज्य के विकास की दिशा में उनकी भागीदारी को और मजबूत करेगा।
बिहार की विकास योजनाओं में अहम भूमिका
बिहार राज्य योजना पर्षद राज्य के विकास से संबंधित प्राथमिकताओं और योजनाओं पर काम करने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था है। उपाध्यक्ष के रूप में देवेश कुमार को बिहार की विकास योजनाओं और नीतिगत मामलों से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। उनकी नियुक्ति से राज्य के विकास एजेंडे को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, खासकर भाजपा के दृष्टिकोण से।
देवेश कुमार की नियुक्ति राज्य की विकास योजनाओं और नीतिगत निर्णयों पर सीधा असर डालने वाले कदम के रूप में देखी जा रही है। उन्हें तीन वर्षों के लिए मंत्री का दर्जा भी मिला है।
देवेश कुमार लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। पार्टी ने उन्हें अलग-अलग स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। वर्तमान में वे मिजोरम भाजपा के राज्य प्रभारी के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक विस्तार से जुड़ी भूमिका है। बिहार राज्य योजना पर्षद में उनकी यह नई जिम्मेदारी संगठन में उनके अनुभव और राजनीतिक भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
विधान परिषद सदस्यता से दिया था इस्तीफा
यह उल्लेखनीय है कि देवेश कुमार वर्ष 2021 में राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद के सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल अगले वर्ष मार्च तक जारी रहना था। हालांकि, उन्होंने बाद में अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। यह फैसला उस समय की बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ था।
दरअसल, पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश उस समय विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मंत्री पद पर बने रहने के लिए तय अवधि के भीतर किसी सदन की सदस्यता हासिल करना अनिवार्य होता है। देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट का रास्ता दीपक प्रकाश के लिए खुला, जिसके बाद राज्यपाल कोटे से उनका बिहार विधान परिषद में मनोनयन किया गया। अब राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष के रूप में देवेश कुमार की वापसी बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों में एक नई भूमिका के साथ हुई है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बिहार में विकास योजनाओं, सरकारी प्राथमिकताओं और नीतिगत फैसलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हैं। राज्य योजना पर्षद में देवेश कुमार की मौजूदगी से भाजपा के एक अनुभवी संगठनात्मक नेता को सरकार की विकास प्रक्रिया से सीधे जुड़ने का अवसर मिला है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य की नीतियों और योजनाओं पर दिख सकता है।







