Bihar Police: दरभंगा और सीतामढ़ी जिले में 13 गंभीर मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात पवन यादव को बिहार पुलिस ने धर दबोचा है। नालंदा जिले के राजगीर में गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। जमीन विवादों में मारपीट, लूट और गोलीबारी जैसे संगीन आरोपों का सामना कर रहे पवन यादव की तलाश दरभंगा और सीतामढ़ी पुलिस को थी। इस गिरफ्तारी को पुलिस की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
राजगीर से हुई गिरफ्तारी, ऐसे चला ऑपरेशन
एसडीपीओ सदर-2 शुभेन्द्र कुमार सुमन ने कमतौल थाना में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इस गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष छापामार दल का गठन किया गया था। गुप्त सूचना मिलने के बाद इस टीम ने नालंदा जिले के राजगीर में छापा मारा और पवन यादव को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी कमतौल थाना क्षेत्र की ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत के पौनद गांव निवासी कपलेश्वर यादव का पुत्र है। गिरफ्तारी के बाद सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, पवन यादव कई मामलों में आरोप-पत्रित है और दरभंगा तथा सीतामढ़ी की अदालतों से भगोड़ा घोषित था।
एसडीपीओ शुभेन्द्र कुमार सुमन ने मीडिया को बताया, ‘पवन यादव कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित था। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर गठित टीम ने सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए उसे राजगीर से गिरफ्तार किया है। यह पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सफलता है।’
पवन यादव पर दर्ज हैं 13 गंभीर मामले
पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, पवन यादव के खिलाफ कुल 13 मामले दर्ज हैं। इसमें दरभंगा जिले के कमतौल थाना में आठ, जाले थाना में एक, सिमरी थाना में एक, बहेड़ी थाना में एक और नगर थाना में एक मामला शामिल है। इसके अतिरिक्त, सीतामढ़ी जिले के पुपरी थाना में भी उसके खिलाफ एक मामला दर्ज है। इस ऑपरेशन में पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी, अवर निरीक्षक सुभाष प्रसाद, प्रअनि मुन्ना कुमार और कमतौल थाना के सशस्त्र बल शामिल थे।
जमीन विवाद में दो बार हमला, लूट और गोलीबारी का आरोप
पवन यादव पर जमीन विवाद से जुड़े कई गंभीर आरोप हैं। कमतौल थाना कांड संख्या 39/26 में पौनद गांव निवासी सीता देवी ने आरोप लगाया था कि 19 फरवरी 2026 की दोपहर राजेश यादव, रामप्रवेश यादव, पवन यादव समेत पांच नामजद और 20 अज्ञात लोग उनके घर में जबरन घुस आए। इस दौरान मारपीट की गई और 45 हजार रुपये नकद तथा करीब एक लाख रुपये के जेवरात लूट लिए गए। आवेदन में जमीन विवाद को ही इस घटना का मुख्य कारण बताया गया था।
अगले ही दिन, बीस फरवरी को, सीता देवी के फर्द बयान के अनुसार, थाना से लौटने के लगभग दो घंटे बाद दोबारा हमला हुआ। इस बार राजेश यादव, पवन यादव, रामप्रवेश यादव, रौशन कुमार यादव और उत्कर्ष यादव सहित 19 नामजद और 25 अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर हमला किया। बयान में बताया गया कि हमलावरों के पास लोहे की रॉड, शॉकर और पिस्टल जैसे हथियार थे। मारपीट और गोलीबारी की इस घटना में सीता देवी और उनके पुत्र गौतम कुमार जख्मी हुए थे। इस दौरान डेढ़ लाख रुपये नकद और 80 हजार रुपये के जेवरात लूटे जाने का भी आरोप है। पवन यादव की गिरफ्तारी से इन मामलों में न्याय की उम्मीद जगी है।







