Bihar Sanskrit Education Board: बिहार में संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने मध्यमा 2026 परीक्षा का परिणाम रिकॉर्ड 27 दिनों के भीतर जारी कर दिया है। बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस बार 87 फीसदी से अधिक परीक्षार्थी सफल हुए हैं। इस सफलता में छात्राओं की संख्या भी सराहनीय रही है।
संस्कृत शिक्षा में सुधार और नए पाठ्यक्रम पर जोर
हथुआ राज ज्ञानोदय संस्कृत महाविद्यालय, मंदिरी, पटना में रविवार को आयोजित सम्मान समारोह में बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड की कार्य संस्कृति लगातार विकसित हो रही है। छात्रों की सहूलियत हमेशा पहली प्राथमिकता पर रहती है। अध्यक्ष श्री झा ने गुणवत्तापूर्ण संस्कृत शिक्षा पर विशेष बल दिया। उन्होंने समाज और शिक्षकों दोनों से अपील की कि संस्कृत के समग्र विकास के लिए प्रारंभिक कक्षाओं से ही ध्यान देना जरूरी है। बोर्ड नए पाठ्यक्रम और पुस्तक प्रकाशन के लिए भी लगातार प्रयासरत है, जिससे संस्कृत शिक्षा को आधुनिक और प्रासंगिक बनाया जा सके।






मृत्युंजय कुमार झा ने कहा, ‘बोर्ड की कार्य संस्कृति रोज विकसित हो रही है। छात्रों की सहूलियत पहली प्राथमिकता रखते हुए बोर्ड ने रिकार्ड समय मात्र 27 दिनों के भीतर मध्यमा 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, इस बार बच्चों का रिजल्ट बहुत ही स्पष्ट रहा और कमतर पेंडिंग रहा। करीब 87 फीसदी से अधिक बच्चे उत्तीर्ण रहे जिसमे सराहनीय संख्या बच्चियों की भी रही।’
सम्मान समारोह में जुटे गणमान्य
हथुआ राज ज्ञानोदय संस्कृत महाविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित इस सम्मान समारोह में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ अनिल कुमार झा ने कार्यक्रम का संचालन किया। महाविद्यालय के सचिव डॉ अनिल कुमार ईश्वर ने अध्यक्ष श्री झा द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के पूर्व कुलपति डॉ अरविंद कुमार पांडे ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि बोर्ड कई मायनों में बदल चुका है, जिसका पूरा श्रेय अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा को जाता है।

इस अवसर पर एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी अविनाश किशोर के नेतृत्व में साफ-सफाई का अभियान भी चलाया गया, जिसमें बीएफएन ट्रस्ट ने भी सहयोग किया। सीनेटर पंकज मोहन झा ने भी अध्यक्ष का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में बोर्ड के मान्य सदस्य अरुण कुमार झा और धानेश्वर कुशवाहा, संस्कृतज्ञ एवं समाजसेवी चंद्र किशोर कुमार, भगवान झा, अमरेश चौधरी, राम सजीवन झा, डॉ भार्गव कुमार, निपु शर्मा, अविनाश किशोर, मनीष कुमार, प्रमोद शर्मा और ट्रस्ट के सचिव रोहित कुमार सहित छात्र-छात्राएं, अभिभावक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे।
संस्कृत शिक्षा के भविष्य पर बोर्ड का ध्यान
बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने आगे कहा कि संस्कृत शिक्षा को लेकर बोर्ड का विजन स्पष्ट है। भविष्य में भी छात्रों के हित को सर्वोपरि रखते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने पर काम जारी रहेगा। यह रिकॉर्ड समय में रिजल्ट जारी करना इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।









