Uttar Pradesh IAS: उत्तर प्रदेश में एक आईएएस अधिकारी के बेबाक पत्र ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकार को पाँच पन्नों का एक पत्र लिखकर अपनी पोस्टिंग और कामकाज पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अगर उनके पास काम सीमित है तो सरकार या तो उन्हें आधी सैलरी दे दे, या फिर किसी ऐसी जगह तैनात करे जहाँ वे नियमों के मुताबिक काम कर सकें। उनका यह पत्र सुशासन के मॉडल और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘आधी सैलरी दें या दूसरे राज्य भेजें’: Uttar Pradesh IAS अधिकारी का सीधा आरोप
रिंकू सिंह राही ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उन्हें संविधान और नियमों के अनुसार काम करने का अवसर नहीं मिलता है, तो उन्हें उत्तर प्रदेश के किसी ऐसे जिले में भेजा जाए जहाँ वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें। उन्होंने यहाँ तक कहा है कि अगर यह भी संभव न हो, तो उन्हें किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए।






जालौन में अवैध कब्जों और अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई करने के दौरान उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ा। एक विधायक के सामने ही जिलाधिकारी ने कथित तौर पर निर्देश दिया कि कुछ मामलों में कार्रवाई न की जाए। एक कैबिनेट मंत्री के नाम का उपयोग कर कुछ मामलों की जाँच प्रभावित करने की कोशिश की गई।
उन्होंने जालौन में अवैध कब्जों और खनन के मामलों में कार्रवाई के दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का सामना करने का दावा किया है। राही के मुताबिक, एक विधायक के सामने ही जिलाधिकारी ने कथित तौर पर कुछ मामलों में कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। उन्होंने एक कैबिनेट मंत्री के नाम का उपयोग कर कुछ मामलों की जाँच प्रभावित करने की कोशिश का भी आरोप लगाया है।

साधारण पृष्ठभूमि से आए रिंकू सिंह राही के सुशासन के सुझाव
रिंकू सिंह राही एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों में पढ़ाई की और देश की प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा पास की। वे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के मूल निवासी हैं, जहाँ उनके पिता आटा चक्की चलाते थे। स्कॉलरशिप के सहारे इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर उन्होंने यह मुकाम पाया है।
अपने पत्र में उन्होंने सरकार को सुशासन के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। राही का मानना है कि प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ शिकायतों का निपटारा करना नहीं, बल्कि समस्याओं का स्थायी समाधान खोजना होना चाहिए। उन्होंने सोशल ऑडिट, सरकारी जमीनों के बेहतर प्रबंधन, ग्रामीण स्तर पर जवाबदेही तय करने, लाइब्रेरी, खेल के मैदान और जीरो पॉवर्टी मॉडल जैसे उपायों पर जोर दिया है। उनका कहना है कि शासन का अर्थ केवल फाइलों का निस्तारण नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जहाँ नई शिकायतें पैदा ही न हों।
रिंकू सिंह राही का यह पत्र उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे और राजनीतिक प्रभाव पर गंभीर बहस छेड़ सकता है। उनके द्वारा लगाए गए आरोप और दिए गए सुझाव शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं, जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।









