Bihar Farmers: भीषण गर्मी, तेज धूप और उमस के बीच दरभंगा जिले के किसान अपनी धान की फसल को बचाने के लिए दिन-रात खेतों में जुटे हुए हैं। जाले प्रखंड सहित अन्य क्षेत्रों में कम बारिश के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों के बावजूद, किसान हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि धान का बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। वे खरपतवारनाशी का छिड़काव कर रहे हैं और गले हुए पौधों की जगह दोबारा रोपाई कर रहे हैं।
मौसम की मार: खरपतवार और जलजमाव की दोहरी चुनौती
अपेक्षित बारिश नहीं होने से खेतों में खरपतवार तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे फसल की वृद्धि बाधित हो रही है। इसके साथ ही, गहरे खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण जलजमाव की समस्या भी गंभीर है। तेज धूप की गर्मी से जलजमाव वाले खेतों का पानी गर्म हो रहा है, जिससे धान के पौधे गलने लगे हैं। रतनपुर के किसान राज सिंघानिया, कन्हैया झा, राजा सहनी और प्रकाश दास ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। जोगियारा के भोला प्रसाद सिंह और जाले के प्रेम कुमार धीर ने भी बताया कि इन प्रतिकूल परिस्थितियों ने धान की फसल को संकट में डाल दिया है।






किसानों का कहना है कि मौसम की इन चुनौतियों के बीच भी धान की अच्छी पैदावार के लिए समय पर कृषि कार्य पूरा करना बेहद आवश्यक है। उनकी यह मेहनत न केवल उनकी आजीविका के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
फसल बचाने को किसान कर रहे दिन-रात मेहनत
किसान खरपतवार की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर खरपतवारनाशी दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, ताकि अनावश्यक घास-फूस पर नियंत्रण पाया जा सके। जिन खेतों में जलजमाव या अन्य कारणों से धान के पौधे गल गए हैं, वहां किसान अपनी बची हुई नर्सरी या खेतों में उगे घने हिस्सों से बिचड़ा उखाड़कर दोबारा रोपाई कर रहे हैं। इस तरह वे फसल को बचाने और उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर को कम करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर किसान मौसम की इन विकट चुनौतियों के बीच अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि समय पर किए जा रहे इन उपायों से धान की फसल की बढ़वार बेहतर होगी और अंततः उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।








