Darbhanga News: दरभंगा के जाले प्रखंड स्थित काजी-बहेड़ा गांव में एक दृष्टिहीन पिता और उनके दिव्यांग बेटे के बेसहारा परिवार को नया पक्का मकान मिला है। बुधवार को संत रामपाल महाराज की प्रेरणा से संचालित मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ने अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत इस परिवार को ‘समर्थ कबीर के सुदामा का महल’ नामक सर्वसुविधायुक्त आवास भेंट किया। गृह प्रवेश समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में परिवार को नए घर की चाबी सौंपी गई, जिससे उनकी वर्षों की परेशानी समाप्त हो गई।
‘समर्थ कबीर के सुदामा का महल’: क्या है खास?
मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध कराए गए इस आवास को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, ताकि परिवार को आधुनिक जीवनशैली की सभी सुविधाएं मिल सकें। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि 9×74 फुट क्षेत्रफल में बने इस मकान में चार कमरे हैं। इसके अलावा, इसमें एक शौचालय, बाथरूम, आधुनिक रसोई, बिजली की फिटिंग तथा पानी की टंकी व नल की व्यवस्था भी की गई है। मच्छरों और कीड़े-मकोड़ों से बचाव के लिए वेंटिलेटर और दरवाजों पर दोहरी जाली भी लगाई गई है, जिससे परिवार सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में रह सके।






जनप्रतिनिधियों ने सराही पहल, ट्रस्ट का संकल्प
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कई स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट की इस पहल की सराहना की। उपस्थित लोगों में 1/1 जिला पार्षद के प्रतिनिधि जुल्करनैन, जिला परिषद सदस्य रंजना कुमारी, बंधौली पंचायत के मुखिया मोहम्मद सनाउल्लाह अशरफ, सरपंच राम प्रताप चौपाल और काजी बहेरा के पूर्व मुखिया महेश प्रसाद शामिल थे।

पूर्व मुखिया महेश प्रसाद ने कहा, “मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है और इस परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास सराहनीय है।”
मुखिया मोहम्मद सनाउल्लाह अशरफ ने इस कार्य को समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया, जबकि जिला परिषद सदस्य मोहम्मद जुल्करनैन ने भी ट्रस्ट के सेवा कार्यों की प्रशंसा की। मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के बिहार राज्य के सेवादार नागेंद्र दास और सुशांत दास ने बताया कि संस्था बिना किसी सरकारी अनुदान के जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचा रही है। उनका मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े असहाय लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
बेसहारा परिवार की संघर्ष गाथा
यह मकान शंकर चौपाल के परिवार को मिला है, जो स्वयं 36 वर्षीय दृष्टिहीन हैं। उनका 18 वर्षीय पुत्र अजय भी दिव्यांग है, जिससे परिवार की चुनौतियां और बढ़ जाती हैं। सात सदस्यीय इस परिवार की आजीविका मुख्य रूप से शंकर की पत्नी किरण देवी की लगभग दो हजार रुपये मासिक आय पर निर्भर थी, जो अत्यंत कम है। ट्रस्ट ने केवल मकान ही नहीं, बल्कि अप्रैल 2025 से परिवार को राशन, कपड़े और शिक्षा सामग्री उपलब्ध करानी भी शुरू की थी। नए मकान के साथ, परिवार को बर्तन, बेड, गद्दे और अन्य आवश्यक गृहस्थी का सामान भी प्रदान किया गया है, ताकि वे तुरंत एक नया और बेहतर जीवन शुरू कर सकें।









