Darbhanga News: दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में बाढ़ की भयावह स्थिति ने बच्चों के भविष्य को गहरे संकट में डाल दिया है। यहां स्कूल तो खुले हैं, लेकिन जलभराव और अनियमित नाव परिचालन के चलते छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पटरी से उतर गई है। नाविकों की मनमानी और अवैध वसूली के कारण हजारों बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाने से वंचित रह रहे हैं।
सरकारी नावों पर भी 50 रुपये की अवैध वसूली, शिक्षक भी परेशान
बाढ़ प्रभावित इटहर, चौकिया, लक्ष्मीनिया, बल्थरबा, पोखर, गोबराही, तिलकेश्वर, उजुआ, सिमरटोका, झाझा, गाइजोडी और सुघराईन जैसे कई गांवों के विद्यार्थियों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। लेकिन, नाविकों की लापरवाही और अवैध वसूली ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्कर्मीत मध्य विद्यालय बर्निया के शिक्षक घनश्याम ठाकुर और पप्पू ठाकुर बताते हैं कि अंचल प्रशासन सरकारी नावों की बात तो करता है, लेकिन नाविक हर यात्री से नदी पार कराने के लिए 50 रुपये वसूलते हैं। गोबराही के अशोक यादव ने भी इस बात की पुष्टि की।






शिक्षक घनश्याम ठाकुर और पप्पू ठाकुर ने बताया, ‘आज बुधवार को भी एक तरफ से 50 रुपये देने पड़े, तब जाकर नाविक नाव से नदी पार उतारा।’ नाविक नीरज कुमार का कहना है, ‘रुपया दीजिए तो नाव पर आइए। हमलोग कोई अन्य काम से नहीं जाते।’
शिक्षकों ने यह भी बताया कि उन्हें घंटों नाविकों का इंतजार करना पड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में बाधा आती है। सीओ साहब को स्थानीय स्तर पर इसकी सूचना दी गई है, लेकिन उनकी ‘कार्रवाई होगी’ की बात सिर्फ आश्वासन बनकर रह गई है। किसी भी नाव पर सरकारी झंडा या बोर्ड नहीं लगा है, जिसका फायदा नाविक उठा रहे हैं और बाढ़ पीड़ित अपनी मजबूरी झेल रहे हैं।

घटती उपस्थिति और अधूरा पाठ्यक्रम, अभिभावकों की चिंता बढ़ी
अवैध वसूली और अनियमित नाव सेवा का सीधा असर विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति पर दिख रहा है। कई कक्षाओं में आधे से भी कम छात्र पहुंच रहे हैं। शिक्षक भी समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे पहली और दूसरी अवधि की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में पाठ्यक्रम पूरा करना शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।अभिभावकों की सुरक्षा चिंता भी चरम पर है। उनका कहना है कि तेज बहाव और क्षमता से अधिक यात्रियों से भरी नावों में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा है। इसी डर से कई परिवारों ने बच्चों को फिलहाल घर पर ही रोक रखा है। वे सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था होने के बाद ही बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की बात कहते हैं।
एसडीओ ने जांच और कार्रवाई का दिया आश्वासन
ग्रामीणों और शिक्षकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विद्यालय समय के अनुरूप विशेष नाव सेवा शुरू की जाए। साथ ही, जरूरत पड़ने पर अस्थायी शिक्षण केंद्र, अतिरिक्त कक्षाएं या ऑनलाइन एवं सामुदायिक शिक्षण जैसी वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।इस गंभीर मामले पर एसडीओ शशांक राज ने संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि सरकारी नावों के संचालन से जुड़ी शिकायतों की जांच कराई जाएगी। एसडीओ ने यह भी आश्वासन दिया कि नावों पर सूचना बोर्ड लगाने, समय निर्धारित करने और किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली पाए जाने पर संबंधित नाविक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित होती है। यदि समय रहते स्थायी और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका असर केवल इस शैक्षणिक सत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी पड़ेगा।









