Bihar Court News: बिहार के दरभंगा व्यवहार न्यायालय में हाल ही में कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई हुई। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आदि देव की अदालत ने अपहरण और साइबर अपराध के दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इसी बीच, विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार ठाकुर की अदालत ने एससी/एसटी एक्ट के तहत 24 दिनों से जेल में बंद एक पत्रकार समेत दो लोगों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
अपहरण के आरोपी सलाउद्दीन की जमानत याचिका खारिज
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आदि देव की अदालत ने अपहरण के एक गंभीर मामले में आरोपी सलाउद्दीन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। सलाउद्दीन, जो लहेरियासराय थाना क्षेत्र के पुरानी मचट्टा बाकरगंज मोमिन टोला निवासी निज़ामुद्दीन का पुत्र है, पर दो बच्चों की मां का अपहरण करने का आरोप है।






इस मामले में अपहृता के साथ उसका एक पुत्र और एक पुत्री भी शामिल थे। इस जघन्य अपराध की प्राथमिकी सदर थाना में 4 अक्टूबर 2024 को कांड संख्या 256/2024 के तहत दर्ज की गई थी। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कोई राहत नहीं दी।
साइबर अपराध और उन्माद फैलाने के मामले में अरशद इकबाल को भी झटका
न्यायाधीश आदि देव की अदालत ने साइबर थाना प्राथमिकी संख्या 24/26 के एक अन्य अभियुक्त अरशद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी। अरशद इकबाल, जो बहादुरपुर थाना के एकमिघाट निवासी नक्की अहमद का पुत्र है, पर सोशल मीडिया के माध्यम से उन्माद फैलाने का आरोप है।
आरोप के मुताबिक, अरशद इकबाल ने जानबूझकर और सुनियोजित साजिश के तहत असत्य, भ्रामक और आपत्तिजनक संदेश भेजकर एक समुदाय विशेष के विरुद्ध उन्माद फैलाने का कृत्य किया। इस घटना के कारण मिथिला माइनॉरिटी डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल एकमिघाट में दहशत का माहौल बन गया था। डेंटल कॉलेज के कैंपस सुपरवाइजर के आवेदन पर साइबर थाना में यह प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पत्रकार विजय कुमार गुप्ता को 24 दिन बाद मिली जमानत
दूसरी ओर, दरभंगा के एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार ठाकुर की अदालत ने केवटी के पत्रकार विजय कुमार गुप्ता और एक अन्य इकबाल अंसारी को जमानत पर मुक्त करने का आदेश दिया है। दोनों 24 दिनों से काराधीन थे।
यह मामला केवटी प्रखंड के प्रखंड प्रमुख द्वारा दर्ज कराया गया था, जिसमें दोनों पर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए रंगदारी मांगने का आरोप लगाया गया था। यह प्राथमिकी कांड संख्या 173/26 के तहत संस्थित की गई थी। बुधवार को न्यायालय के इस फैसले से पत्रकार और उनके साथी को बड़ी राहत मिली है।







