Bihar Boat Ghat: राज्य सरकार ने बिहार में नाव घाटों के बंदोबस्ती और प्रबंधन के लिए नई नियमावली अधिसूचित की है। इसके तहत सभी सरकारी नाव घाटों को अब खुली नीलामी प्रणाली के माध्यम से पट्टे पर दिया जाएगा। यह महत्वपूर्ण निर्णय राज्य कैबिनेट द्वारा ‘बिहार नाव घाट बंदोबस्ती एवं प्रबंधन नियमावली, 2026’ को स्वीकृति दिए जाने के बाद लिया गया है, और अब इसे लागू करने के लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
सरकारी घाटों की होगी खुली नीलामी
नई नियमावली के अनुसार, बिहार में सरकारी स्वामित्व वाले नाव घाटों का आवंटन खुली नीलामी प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। जो व्यक्ति या संस्था सबसे अधिक बोली लगाएगी, उसे तीन से पांच साल की अवधि के लिए घाट का संचालन करने का अधिकार मिलेगा। इस कदम से घाटों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।






पारदर्शिता और बेहतर सुविधाएं होंगी सुनिश्चित
यह नियमावली सरकारी और निजी दोनों प्रकार के नाव घाटों की स्थापना, संचालन और बंदोबस्ती के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है। इसमें नावों के पंजीकरण, टोल संग्रह, निगरानी तंत्र, नियमों के उल्लंघन पर दंड और अपील दायर करने की प्रक्रिया से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि नीलामी-आधारित यह नई प्रणाली बंदोबस्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगी और नाव घाटों के संचालन से होने वाले राजस्व में वृद्धि करेगी। अधिकारियों का मानना है कि इन सुधारों से नदी पार करने वाले यात्रियों के लिए सुविधाओं में सुधार होगा और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलेगा।
राजस्व से बदलेगी घाटों की तस्वीर
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नाव घाटों से प्राप्त राजस्व का उपयोग सुविधाओं के रखरखाव, मरम्मत और स्वच्छता के लिए किया जाएगा। इन निधियों का उपयोग यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने और राज्य भर में नदी परिवहन बिंदुओं पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि ‘बिहार नाव घाट बंदोबस्ती एवं प्रबंधन नियमावली, 2026’ राज्य की नदी परिवहन प्रणाली को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और सुरक्षित बनाएगी। इससे समान परिचालन मानक स्थापित होंगे और एक संरचित प्रबंधन ढांचा तैयार होगा, जिससे अंततः नदी परिवहन उपयोगकर्ताओं को बड़ा लाभ मिलेगा।








