Darbhanga Court Decision: बिहार के दरभंगा सिविल कोर्ट ने एक राहगीर की मौत के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने मंगलवार को मो. आजाद नाम के व्यक्ति को पांच साल के कारावास और पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। यह मामला गैर इरादतन हत्या से जुड़ा है, जिसमें बहेड़ी निवासी राजकपुर शर्मा की जान चली गई थी।
कोर्ट ने 12 अगस्त को मो. आजाद को दोषी करार दिया था। इसके बाद, सजा की अवधि तय करने के लिए 25 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई थी। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने अदालत को बताया कि 13 जून 2024 की रात 9 बजे यह घटना हुई थी। बहेड़ी में अपने घर की छत से रोड़ेबाजी कर रहे अभियुक्त मो. आजाद के फेंके गए पत्थर से राहगीर राजकपुर शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गहरी चोट आई थी।
रोड़ेबाजी से घायल राहगीर की पटना में हुई मौत
शुरुआत में घायल राजकपुर शर्मा का इलाज बहेड़ी अस्पताल में किया गया। लेकिन, चोट की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (डीएमसीएच) भेजा गया। यहां भी स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया गया। पीएमसीएच में इलाज के दौरान ही राजकपुर शर्मा ने दम तोड़ दिया।
मृतक के चचेरे भाई सुरेश शर्मा के आवेदन पर बहेड़ी थाना में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत कांड संख्या 201/24 दर्ज की गई थी। पुलिस ने महज दो महीने के भीतर अनुसंधान पूरा कर अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया। इस मामले का विचारण सत्रवाद संख्या 155/25 के तहत चला।
अदालत ने सात गवाहों के बयानों पर दिया फैसला
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी दिलीप कुमार साह ने कुल सात गवाहों की गवाही कराई, जिसमें अनुसंधानकर्ता (आईओ) और डॉक्टर भी शामिल थे। बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद, अपर सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने अभियुक्त मो. आजाद को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी घोषित किया।
अदालत ने गैर इरादतन हत्या को देखते हुए पांच साल का कारावास और पचास हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड नहीं देने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
मो. आजाद 17 जून 2024 से ही न्यायिक हिरासत में है। मंगलवार को सजा की अवधि निर्धारण के लिए बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच बहस हुई। कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या के मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो लापरवाही से होने वाली मौतों पर न्यायिक सख्ती का संदेश देता है।







