Darbhanga News: दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित मुरैठा के खनुआ में निर्माणाधीन आरसीसी पुल का ध्वस्त डायवर्सन आखिरकार मरम्मत के बाद आवागमन के लिए फिर से खोल दिया गया है. इस अस्थायी बहाली से स्थानीय लोगों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन कार्य एजेंसी द्वारा की गई ‘कामचलाऊ’ व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आशंका जताई जा रही है कि तेज जल प्रवाह की स्थिति में यह डायवर्सन फिर से ध्वस्त हो सकता है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी और सुरक्षा को खतरा पैदा होगा.
दरभंगा में खुला पुल का डायवर्सन, लेकिन ‘ये’ गलती फिर ला सकती है बड़ी मुसीबत!
Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में जाले प्रखंड के मुरैठा खनुआ में निर्माणाधीन आरसीसी पुल का ध्वस्त डायवर्सन मरम्मत के बाद एक बार फिर आवागमन के लिए खोल दिया गया है। हालांकि, कार्य एजेंसी द्वारा की गई इस ‘कामचलाऊ’ व्यवस्था पर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मरम्मत के बावजूद, इसके स्थायित्व को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।






दो ह्यूम पाइप की ‘अधूरी’ मरम्मत
कार्य एजेंसी ने ध्वस्त हुए डायवर्सन की मरम्मत के लिए सिर्फ दो ह्यूम पाइप का इस्तेमाल किया है। इस अस्थायी समाधान से फिलहाल वाहनों और पैदल यात्रियों को राहत मिली है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। मस्सा गांव के सामाजिक कार्यकर्ता सुदिष्ट ठाकुर, राधेश्याम ठाकुर और संजय प्रसाद ने इस मरम्मत को केवल कामचलाऊ बताया है।
उनका स्पष्ट मत है कि नदी के पानी के समुचित प्रवाह को ध्यान में रखते हुए कम से कम चार से पांच ह्यूम पाइप लगाए जाने चाहिए थे। ऐसा करने पर ही डायवर्सन अधिक मजबूत और टिकाऊ बन पाता। वर्तमान व्यवस्था में पाइपों की संख्या कम होने से यह आशंका बनी हुई है कि जल प्रवाह की गति तेज होने पर यह डायवर्सन फिर से ध्वस्त हो सकता है, जिससे लोगों को दोबारा परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों को राहत, लेकिन भविष्य की चिंता
डायवर्सन के चालू होने से मुरैठा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में तत्काल राहत मिली है। पिछले दिनों डायवर्सन टूटने के बाद से उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन यह राहत अल्पकालिक साबित हो सकती है, यदि नदी में पानी का स्तर बढ़ता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं की आशंकाएं स्थानीय निवासियों की चिंता को भी बढ़ा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में ऐसी स्थिति बन जाती है, जिससे उन्हें बार-बार परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने प्रशासन और कार्य एजेंसी से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में उन्हें ऐसी मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, दरभंगा में यह अस्थायी मरम्मत स्थानीय लोगों को तत्काल सुविधा दे रही है, लेकिन इसकी स्थिरता और सुरक्षा पर सवाल अभी भी बरकरार हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि यह ‘कामचलाऊ’ व्यवस्था बड़ी मुसीबत का कारण न बने।
सिर्फ दो ह्यूम पाइप से आवागमन बहाल, स्थायित्व पर संदेह
कार्य एजेंसी ने ध्वस्त हुए डायवर्सन की मरम्मत के लिए सिर्फ दो ह्यूम पाइप जोड़े हैं. इन पाइपों को जोड़कर ही आवागमन को बहाल किया गया है. हालांकि, इस व्यवस्था की स्थायित्व को लेकर स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता चिंतित हैं. उनका मानना है कि यह समाधान दीर्घकालिक नहीं है और कभी भी टूट सकता है.
मस्सा के सामाजिक कार्यकर्ता सुदिष्ट ठाकुर, राधेश्याम ठाकुर और संजय प्रसाद ने इस मरम्मत को केवल कामचलाऊ बताया है. उन्होंने कहा, ‘नदी के पानी के समुचित प्रवाह को ध्यान में रखते हुए चार से पांच ह्यूम पाइप लगाकर मरम्मत की जाती तो डायवर्सन अधिक मजबूत और टिकाऊ होता.’
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ता है या जल प्रवाह की गति तेज होती है, तो यह वर्तमान व्यवस्था फिर से ढह सकती है. उन्होंने स्थायी और मजबूत समाधान की मांग की है ताकि लोगों को बार-बार परेशानी का सामना न करना पड़े और कोई अप्रिय घटना न हो.
अधूरा समाधान और भविष्य की चिंता
फिलहाल डायवर्सन के चालू होने से दैनिक यात्रियों और स्थानीय निवासियों को आवागमन में मिली तात्कालिक राहत बहुत अल्पकालिक साबित हो सकती है. कार्य एजेंसी द्वारा अपनाए गए इस अधूरे समाधान से भविष्य में फिर से परेशानी का सामना करने की आशंका बनी हुई है. स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को इस अस्थायी व्यवस्था की गंभीरता पर ध्यान देना चाहिए और मुरैठा पुल के डायवर्सन के लिए एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित करना चाहिए, जिससे Darbhanga News में यह मुद्दा स्थायी रूप से हल हो सके.







