Darbhanga Snake Bite: बिहार के दरभंगा में अंधविश्वास के चलते एक युवक की जान चली गई। सांप के काटने के बाद परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक कराने में समय गंवा दिया। जब तक उसे डीएमसीएच पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया, जिससे परिवार में मातम पसर गया है।
मृतक की पहचान बेला मुशहरी बसकट्टी गांव निवासी लालू सदा (30) के रूप में हुई है। वह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। यह दुखद घटना बहेड़ी थाना क्षेत्र में हुई।






हैरान करने वाली खबर! दरभंगा में सांप काटने पर झाड़-फूंक के चक्कर में तड़पकर मर गया युवक
Darbhanga Snake Bite: बिहार के दरभंगा जिले में अंधविश्वास ने एक युवक की जान ले ली। सांप के काटने के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लगे रहे, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका और युवक की मौत हो गई। यह घटना बहेड़ी थाना क्षेत्र के बेला मुशहरी बसकट्टी गांव की है, जहां 30 वर्षीय लालू सदा की जान चली गई।
जानकारी के अनुसार, बुधवार की सुबह लालू सदा शौच के लिए घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान एक जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। घर लौटकर उन्होंने परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी दी। अफसोस की बात यह है कि तत्काल अस्पताल ले जाने की बजाय, परिवार के लोग झाड़-फूंक कराने वाले के पास पहुंच गए।
अंधविश्वास पड़ा भारी, बच सकती थी जान
लालू सदा की हालत झाड़-फूंक के दौरान लगातार बिगड़ती चली गई। जब स्थिति बेहद गंभीर हो गई और अंधविश्वास के सारे उपाय विफल हो गए, तब जाकर परिजन उसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) लेकर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद लालू को मृत घोषित कर दिया। मृतक के चाचा रतिकांत सदा ने भारी मन से बताया कि अगर समय पर अस्पताल लाया गया होता, तो शायद लालू की जान बच सकती थी।
लालू सदा मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके पीछे उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं। सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
डॉक्टरों की चेतावनी: सर्पदंश पर क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय मरीज को बिना देर किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) और उचित चिकित्सा मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते हैं कि सांप काटने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है। अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर लोग अक्सर अपनी जान गंवा देते हैं, जबकि सही समय पर एंटी-स्नेक वेनम से जान बचाई जा सकती है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास के खतरों को उजागर किया है और तत्काल चिकित्सा सहायता के महत्व पर जोर दिया है।
सांप ने डसा, झाड़-फूंक में बीत गया अहम समय
जानकारी के अनुसार, अहले सुबह लालू सदा शौच के लिए घर से बाहर गए थे। इसी दौरान एक जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। घर लौटकर उन्होंने तत्काल अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। लेकिन, परिवार के सदस्यों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बजाय झाड़-फूंक कराने का निर्णय लिया। इस दौरान लालू की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
मृतक के चाचा रतिकांत सदा ने बताया, ‘अगर समय पर अस्पताल लाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।’
काफी देर बाद जब स्थिति गंभीर हो गई, तब उसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डीएमसीएच) ले जाया गया। लेकिन, डॉक्टरों ने उसे बचाने में असमर्थता जताई और मृत घोषित कर दिया। लालू सदा अपने पीछे अपनी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं, जिनके लिए यह घटना किसी वज्रपात से कम नहीं है। सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
डॉक्टरों की सलाह: झाड़-फूंक नहीं, तुरंत इलाज
डॉक्टर लगातार सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक से बचने की सलाह देते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि सांप के काटने पर मरीज को बिना किसी देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) और उचित चिकित्सा मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि अंधविश्वास जीवन के लिए कितना घातक साबित हो सकता है।








