Bihar Panchayat Tax: बिहार की पंचायतों में अब ग्रामीणों और व्यावसायियों को 24 से अधिक तरह के कर (टैक्स) चुकाने होंगे। राज्य सरकार ने बुधवार को ग्राम पंचायतों को इन करों की वसूली के लिए अधिकतम दरें तय करने की मंजूरी दे दी है। यह शुल्क 1 रुपये से शुरू होकर 5 हजार रुपये तक जा सकता है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पंचायतों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
पंचायती राज विभाग के अनुसार, बिहार पंचायत राज अधिनियम-2006 की धारा 27 में कर वसूलने का प्रावधान पहले से ही मौजूद है। सरकार ने अब इन करों, फीस और शुल्कों की अधिकतम दरें निर्धारित कर दी हैं, हालांकि भविष्य में इनमें संशोधन की संभावना भी बनी रहेगी। इस नई व्यवस्था से ग्राम पंचायतें विकास कार्यों के लिए खुद के संसाधनों पर अधिक निर्भर हो सकेंगी।






बड़ी खबर! बिहार के गांवों में अब लगेगा टैक्स, 2 दर्जन से ज्यादा चीजों पर वसूली, जेब पर पड़ेगा सीधा असर
Bihar Panchayat Tax: अब बिहार की पंचायतों में रहने वाले ग्रामीणों और छोटे-बड़े व्यवसायियों को विभिन्न सेवाओं और संपत्तियों पर कर चुकाना होगा। राज्य सरकार ने बुधवार को पंचायतों में दो दर्जन से अधिक प्रकार की कर वसूली दरों को अपनी मंजूरी दे दी है। यह शुल्क 1 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 5 हजार रुपये तक होगा, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, जानिए सरकार का तर्क
राज्य सरकार का कहना है कि इस कदम से पंचायतों की आय में वृद्धि होगी और वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। पंचायती राज विभाग के अनुसार, बिहार पंचायत राज अधिनियम-2006 की धारा 27 में कर वसूलने का प्रावधान पहले से ही मौजूद है। सरकार ने अब इन करों, फीस और शुल्कों की अधिकतम दरें निर्धारित कर दी हैं। हालांकि, इन दरों में भविष्य में संशोधन की संभावना भी जताई गई है।
निजी आवास से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पर लगेगा बिहार पंचायत टैक्स
नए नियमों के तहत, निजी आवासीय भवनों पर भी होल्डिंग कर लगेगा। पक्के मकानों के मालिकों को सालाना अधिकतम 100 रुपये का कर देना होगा, जबकि अर्ध-पक्के घरों के लिए यह राशि 50 रुपये निर्धारित की गई है। मिट्टी के घरों पर कोई कर नहीं लगाया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास या इंदिरा आवास योजना के तहत बने घरों के लिए 25 रुपये सालाना कर का प्रावधान है, लेकिन यह राशि सीधे लाभार्थी से न लेकर संबंधित प्रशासी विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) से ली जाएगी।
व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग वाले भवनों पर 100 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक का सालाना कर लगेगा। इसके अलावा, पंचायत क्षेत्र के तहत विभिन्न पेशों पर भी शुल्क अधिरोपित किया गया है। 2 टन प्रति घंटा से अधिक क्षमता वाली चावल मिलों पर भी कर लगेगा। सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी जैसे बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सालाना 5 हजार रुपये का शुल्क चुकाना होगा। पशु मेले में बेचे जाने वाले पशुओं पर भी शुल्क लिया जाएगा।
पेयजल, सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी शुल्क
ग्राम पंचायतों में पेयजलापूर्ति और कचरा उठाव जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी शुल्क देना होगा। प्रति उपभोक्ता परिवार को प्रतिमाह 30 रुपये का भुगतान करना होगा। सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग पर भी शुल्क लागू होगा। पंचायतों में संचालित पक्की दुकानों और कच्ची गुमटी दुकानों से भी कर लिया जाएगा। बस पड़ाव और टेंपो स्टैंड पर आने-जाने वाले प्रत्येक वाहन पर भी शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस फैसले पर कहा, “टैक्स से प्राप्त राशि से पंचायतों का विकास होगा और वे आत्म निर्भर बनेंगी। इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ही कर की दरों का निर्धारण किया गया है।” हालांकि, मंत्री ने पहले गांवों में कर प्रणाली शुरू करने का विरोध किया था, और विपक्षी दलों की ओर से भी इस पर विरोध की आशंका है।
यह नई कर प्रणाली बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय शासन पर गहरा प्रभाव डालेगी। एक ओर जहां यह पंचायतों को अपने विकास कार्यों के लिए धन जुटाने में मदद करेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों और छोटे व्यवसायियों पर एक नया वित्तीय बोझ भी डालेगी, जिसकी प्रतिक्रिया आने वाले समय में देखने को मिल सकती है।
गांवों में घरों पर कितना लगेगा टैक्स? जानिए पूरी लिस्ट
निजी आवासीय भवनों पर होल्डिंग कर के रूप में सालाना अधिकतम 100 रुपये तक का भुगतान करना होगा। पक्के घरों के लिए 100 रुपये, जबकि अर्द्धपक्के घरों के लिए 50 रुपये का कर निर्धारित किया गया है। मिट्टी के घरों में रहने वाले परिवारों से कोई कर नहीं लिया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास या इंदिरा आवास योजना के तहत बने घरों के लिए सालाना 25 रुपये का कर लगेगा, जिसकी वसूली संबंधित प्रशासी विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) द्वारा की जाएगी।
- पक्का घर: 100 रुपये सालाना
- अर्द्धपक्का घर: 50 रुपये सालाना
- मिट्टी का घर: कोई कर नहीं
- प्रधानमंत्री आवास/इंदिरा आवास: 25 रुपये सालाना
इसके अलावा, विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों और संपत्तियों पर भी शुल्क लगाए जाएंगे:
- तीर्थ स्थल
- पशु बूचरखाना
- हाट और मेला
- चालव मिल (2 टन प्रति घंटा से अधिक क्षमता)
- पेशा शुल्क (व्यवसायियों पर)
- पक्का दुकान और कच्चा (गुमटी) दुकान
- बस पड़ाव
- टेंपो स्टैंड
व्यवसायियों और संस्थानों पर भारी शुल्क, पेयजल के लिए भी मासिक चार्ज
व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग वाले भवनों पर सालाना 100 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक का कर लगेगा। बड़ी व्यावसायिक इकाइयों जैसे सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसियों को सालाना 5 हजार रुपये का शुल्क देना होगा। पशु मेलों में बेचे जाने वाले पशुओं पर भी बिक्री के हिसाब से शुल्क तय किया गया है।
पेयजल आपूर्ति और कचरा उठाव जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी मासिक शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रत्येक उपभोक्ता परिवार को प्रतिमाह 30 रुपये का भुगतान करना होगा। सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग पर भी शुल्क लगेगा, जिससे इनकी देखरेख और स्वच्छता सुनिश्चित की जा सकेगी।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस फैसले पर कहा, “टैक्स से प्राप्त राशि से पंचायतों का विकास होगा। पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी। इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कर की दरों का निर्धारण किया गया है।”
हालांकि, यह फैसला राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन सकता है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्वयं पहले गांवों में कर प्रणाली शुरू करने का विरोध किया था। विपक्षी दलों द्वारा भी इस कदम का विरोध किए जाने की संभावना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए करों को लागू करने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो सकती है।








