बेनीपुर। मिथिलांचल का प्रसिद्ध लोक पर्व मधुश्रावणी का शुभारंभ आज नाग पंचमी के साथ प्रारंभ हुई। मिथिलांचल के नवविवाहित ललनाओं का प्रसिद्ध लोक पर्व के संबंध में मान्यता है कि नव विवाहिता अपने विवाह की प्रथम वर्ष पूरे विधि विधान के साथ नाग देवता के सभी स्वरूपों का पूजा करती है तो जीवन भर नाग देवता के प्रकोप से वंचित रहता है।
इस पूजा का दो सबसे बड़ी विशेषता है कि इस पूजा की पुरोहित गांव के ही महिला पुरोहित द्वारा विधिपूर्वक पूजा करवाई जाती है दूसरी बासी फूलों से यानी 1 दिन पूर्व चुनकर लाये गये फूलों को सजाया जाता है और अगले दिन नाग देवता की पूजा विधान पूर्वक की जाती है।






खासकर नाग पंचमी से लेकर मधुश्रावणी तक पूजा करने वाली नवविवाहिता ससुराल से आए अन्न, वस्त्र ही ग्रहण करती है और आखिन्न अन्न जल से मात्र एक शाम ग्रहण कर पूजा-अर्चना करती है ।उसके बाद नवविवाहित कन्याओं के साथ पूरे मोहल्ले की ललना रंग-बिरंगे परिधानों में सज कर एक साथ झुंड में गीत गाती हुई गांव के किसी सार्वजनिक स्थल पर जमा होती है।
फूल पत्ती वगैरह चुनकर उसे सजाती है। शाम के समय पुनः गीत गाती हुई अपने घर पहुंचती है। रात में मात्र अखिन्न अन्न और जल के साथ एक ही संध्या भोजन करती है। सुबह उसी बासी फूल से नाग देवता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करती है।
यह निरंतर 14 दिनों तक चलने के बाद 15 वे दिन मधुश्रावणी के दिन टेमी दागने की प्रथा अपनाई जाती है। इसमें विधकरी द्वारा नवविवाहित कन्याओं के घुटने पर पान का पत्ता डालकर जलते हुए आग की बत्ती से जलाया जाता है। इसके संबंध में भी किंबदंती है कि नवविवाहिता की फफोले जितने बड़े होते हैं उसका दांपत्य जीवन उतनी दीर्घायु होती है। साथ ही मधुश्रावणी के अवसर पर ससुराल से आए संदेश जिसमें फल, मिठाई, दही के साथ-साथ अन्य चीजें भेजी जाती है जो कन्या पक्ष की ओर से प्रसाद के रूप में अपने बंधु- बांधवों के बीच वितरित की जाती है।








