Bihar Vigilance Court: भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित न्याय और दोषियों को सजा दिलाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इन फैसलों के तहत, राज्य के सभी नौ प्रमंडल मुख्यालयों में विशेष निगरानी न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, 38 जिलों में निगरानी थाने और 107 अनुमंडलों में आउट पोस्ट (ओपी) भी बनाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य भ्रष्टाचार के मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करना है।
दरभंगा में वकीलों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस फैसले का गर्मजोशी से स्वागत किया है। वरीय अधिवक्ता जितेंद्र नारायण झा की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में वकीलों ने इस घोषणा पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। वकीलों का मानना है कि इन कदमों से भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध मुकदमों का निपटारा तेजी से होगा और उन्हें जल्द सजा मिल पाएगी।






दरभंगा में पुरानी थी विजिलेंस कोर्ट की मांग
दरभंगा प्रमंडलीय मुख्यालय में विशेष निगरानी न्यायालय के गठन की मांग काफी पुरानी थी। वरीय अधिवक्ता जितेंद्र नारायण झा ने बैठक में बताया कि दरभंगा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र नारायण सिन्हा श्रीवास्तव और महासचिव इंद्र शेखर मिश्रा ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया था। अब मुख्यमंत्री के इस फैसले से वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है।
“दरभंगा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र नारायण सिंहा श्रीवास्तव और महासचिव इंद्र शेखर मिश्रा ने इस मांग को प्रमुखता से उठाई थी।”
— जितेंद्र नारायण झा, वरीय अधिवक्ता
भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह निर्णय बिहार में सुशासन स्थापित करने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी ढंग से नकेल कसने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेष निगरानी न्यायालयों के माध्यम से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। निगरानी थानों और आउट पोस्ट की स्थापना से जांच और कानूनी कार्रवाई को निचले स्तर तक मजबूत किया जा सकेगा।
इस बैठक में कई अन्य अधिवक्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया। इनमें अरुण कुमार चौधरी, रमण जी चौधरी, सुरेंद्र कुमार चौधरी, अनिल कुमार मिश्रा, सुधीर कुमार चौधरी, हेमंत कुमार, संतोष कुमार सिन्हा, बुलन कुमार झा, श्याम बिहारी राय, मायाशंकर चौधरी, विजय नारायण चौधरी और नितीश कुमार प्रमुख थे। यह कदम बिहार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।








