दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। निसंदेह, यह दरभंगा पुलिस की अनोठी पहल है। नि:संदेह मां तो मां होती है। कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी।
आखिर, उस घर में मां भी मौजूद थी, जहां उसके ही बेटों ने अपनी बहन यानि उस मां की बेटी का कत्ल कर दिया, लेकिन अब दरभंगा पुलिस और विवि पुलिस की नारी शक्ति को समर्पित यह फैसला देखिए, जहां अपनी बेटी का खून होते देखती मां, हत्या






और पोस्टमार्टम के बाद बेटी की शव तक नहीं लेने पहुंची मां को विवि थानाध्यक्ष मदन प्रसाद ने बरी कर दिया है, और हत्या का इल्जाम दोनों बेटोें पर लगाते उन्हीं दोनों पर एफआईआर की है, मां को फिलहाल राहत देती दिखती दरभंगा पुलिस की यह पहल एक खुद में मिसाल है।
कोई मां अपनी बेटी की हत्या नहीं कर सकती यही मानकर विवि पुलिस के थानाध्यक्ष मदन प्रसाद ने ऑनर किलिंग के मामले से मां को छोड़ दो भाइयों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान को आगे बढ़ाया है। पढ़िए रितेश कुमार सिन्हा की यह रिपोर्ट….
दरभंगा विश्वविद्यालय थाने क्षेत्र के आजमनगर स्थित लुचीवाड़ा मोहल्ले में हॉरर किलिंग में विश्विद्यालय थाना की पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की है। यह बड़ा अजीब भी है, सराहनीय भी है तो सवाल करने वाले सवाल भी पूछेंगे ही। लेकिन, यह एक पहल है। एक साकारात्मक सोच है।
पुलिस के बयान पर दर्ज प्राथमिकी मृतका के दो भाई मुनचुन कुमार व बिट्टू कुमार को आरोपी बनाया गया है जबकि घटना के समय घर मे मौजूद रही मृतका की माँ को इस मामले से बरी कर दिया है। पुलिस का तर्क है कि कोई मां अपनी बेटी की हत्या नही कर सकती है।
इधर युवती की हुई हत्या के मामले में एफएसएल की टीम ने घटनास्थल पर जांच की है। टीम ने वहां से युवती की गर्दन काटने में उपयोग किया गया खून से सना तरछेवा धारदार हथियार बरामद किया।
वहीं घर के अंदर खून लगा एक कपड़ा पाया गया। टीम दोनों सामग्री को जब्त कर अपने साथ ले गई। इसके अलावा कमरे के अंदर से कई जगहों से फिंगरप्रिंट सहित कुछ अन्य सामान के नमूने जांच के लिए लिया गया।
इस मामले में विश्वविद्यालय थाना में पुलिस के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। थाना एएसआई विशेश्वर यादव के आवेदन पर दर्ज प्राथमिकी में मृतका के दो भाइयों मुनचुन कुमार व बिट्टू कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है।
जबकि घटना के समय घर में मौजूद मृतका की मां को पुलिस ने बेकसूर मान लिया है। इस संबंध थानाध्यक्ष मदन प्रसाद ने बताया कि कोई मां अपनी बेटी की हत्या नहीं कर सकती है इसीलिए मां को आरोपी नहीं बनाया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि जब मां ने हत्या नहीं की तो उसने कम से कम हत्या करने में अपने पुत्रों का सहयोग तो जरूर किया है। नहीं तो हत्या करने के दौरान वह बीच बचाव तो कर ही सकती थी। फिर भी पुत्रों ने यदि हत्या कर दी तो उसे घटना की जानकारी पुलिस को और मुहल्लावासियों देनी चाहिए थी।
लेकिन मां भी अर्चना के शव को घर में छोड़कर बेटों के साथ फरार हो गई। इतना ही नही शव को पोस्टमार्टम से लेने तक नही आई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा कर किसी परिजन के आने का इंतजार 24 घंटे तक करती रही है।
अंत मे मंगलवार की देर शाम मृतका बहनोई मधुबनी जिले के बिस्फी थाना क्षेत्र निवासी जगदीश महतो के पुत्र दुर्गेश महतो को शव सौंपा गया। इसके बाद शव की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी ने राहत की सांस ली।








