Kishanganj News: किशनगंज जिले में पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे दो बांग्लादेशी नागरिकों और उन्हें कथित तौर पर शरण देने वाले एक भारतीय व्यक्ति को गिरफ्तार कर एक बड़ा खुलासा किया है। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें कई फर्जी दस्तावेज और विदेशी मुद्रा बरामद हुई है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार बांग्लादेशी दंपती भारत में रहने से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
तलाशी अभियान के दौरान उनके पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नकदी और बांग्लादेशी मुद्रा बरामद हुई है। इस मामले में अब अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों को भी इसकी सूचना भेज दी गई है।






कैसे हुई गिरफ्तारी और क्या-क्या मिला?
यह बड़ी कार्रवाई प्रेम पुल इलाके में चलाए गए वाहन जांच अभियान के दौरान हुई। प्रभारी पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला ने बताया कि एसडीपीओ-1 खुसरू सिराज के नेतृत्व में डीआईयू टीम ने जांच के दौरान एक संदिग्ध बाइक सवार को रोका था। उससे पूछताछ के बाद मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की। इसी कार्रवाई में दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार भारतीय आरोपी की पहचान किशनगंज जिले के महिन गांव निवासी जाकिर हुसैन के रूप में हुई है। वहीं पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान हसन शेख उर्फ हसन उल्लाह और उसकी पत्नी तैयबा इस्लाम उर्फ तंजिला अख्तर के तौर पर की गई है। पुलिस ने बताया कि दोनों क्रमशः बांग्लादेश के शरियतपुर और नारायणगंज जिले के मूल निवासी हैं। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान ये दोनों विदेशी नागरिक भारत में वैध रूप से रहने से संबंधित कोई अधिकृत दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद पुलिस ने उनके कब्जे की तलाशी ली, जिसमें कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पैन कार्ड, दो मोबाइल फोन, आठ सिम कार्ड, एक मोटरसाइकिल, भारतीय मुद्रा और बांग्लादेशी टाका बरामद हुए। सभी बरामद सामान को जब्त कर लिया गया है।
केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल, बड़े नेटवर्क का खुलासा?
इस मामले में किशनगंज थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच केवल इन तीन आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी पहचान पत्र तैयार करने, अवैध रूप से लोगों को शरण देने और सीमा पार से आने वाले लोगों की मदद करने में कहीं कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है।
जांच एजेंसियां अब आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बरामद दस्तावेजों की तकनीकी जांच भी कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि इनका संपर्क किन लोगों से था और फर्जी पहचान से जुड़े दस्तावेज कहां और कैसे तैयार किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों, जिनमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भी शामिल है, को सूचना दे दी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।








