Bihar Satellite Township: अब से कुछ सालों में पटना और इसके आस-पास के जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। बिहार सरकार ने राज्य में 12 प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं पर तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। इन आधुनिक शहरों के बनने से लोगों को विश्वस्तरीय सुविधाएँ मिलेंगी और शहरी विकास का नया मॉडल तैयार होगा।
सर्वे शुरू, जमीन अधिग्रहण की तैयारी
फिलहाल, सरकार ने पाटलिपुत्र, हरिहरनाथपुर, मगध और तिरहुत टाउनशिप के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) का सर्वे शुरू कराया है। यह सर्वे तय करेगा कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कैसे होगी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की क्या व्यवस्था की जाएगी। सबसे पहले पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुर टाउनशिप के कोर एरिया विकसित किए जाएँगे। पाटलिपुत्र में लगभग 3,008 एकड़ और हरिहरनाथपुर में 2,000 एकड़ में आधुनिक टाउनशिप की नींव रखी जाएगी। जमीन अधिग्रहण से पहले हर प्रभावित परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाएगा, ताकि मुआवजा और पुनर्वास पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके।






जमीन के बदले मिलेगा विकसित प्लॉट
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें उसी क्षेत्र में विकसित प्लॉट देने की योजना है। यानी जमीन के बदले सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैस विकसित भूखंड भी मिलेगा। इससे प्रभावित परिवार भविष्य के विकसित शहर का हिस्सा बन सकेंगे।
बुनियादी सुविधाओं से लैस होंगे नए शहर
सरकार की योजना के अनुसार, जमीन अधिग्रहण पूरा होते ही सबसे पहले सड़क, बिजली, पेयजल और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएँ तैयार की जाएँगी। इसके बाद आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत विकास का काम शुरू होगा। पाटलिपुत्र टाउनशिप बिहटा-सरमेरा रिंग रोड, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित फिनटेक सिटी के पास विकसित होगी। वहीं, हरिहरनाथपुर टाउनशिप दीघा-सोनपुर हाईवे, भारतमाला कॉरिडोर और प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट के निकट बसाई जाएगी।
यदि सभी योजनाएँ सफल रहीं, तो पटना के आसपास बसने वाली ये नई सैटेलाइट टाउनशिप न केवल राजधानी का विस्तार करेंगी, बल्कि पूरे बिहार में शहरी विकास का एक नया और प्रभावी मॉडल भी पेश करेंगी।








