Bihar Education Policy: बिहार में स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधारने और छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एससीईआरटी (SCERT) की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का सीधा असर राज्य के करोड़ों विद्यार्थियों पर पड़ेगा, जिससे उन्हें क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई और कौशल विकास का मौका मिलेगा।
पहली से पांचवीं तक मातृभाषा में शिक्षा, अगस्त में शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण
शिक्षा मंत्री के निर्देशानुसार, अब बिहार में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों को हिंदी के साथ-साथ उनकी क्षेत्रीय भाषाओं में भी पढ़ाया जाएगा। इस पहल में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका जैसी स्थानीय भाषाओं को शामिल किया गया है। यह फैसला छात्रों को अपनी मातृभाषा में बेहतर समझ विकसित करने और शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने में मदद करेगा। इसके साथ ही, एससीईआरटी में रिक्त पड़े पदों को जल्द भरने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इन पदों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को जल्द ही अधियाचना भेजी जाएगी, ताकि शिक्षण संस्थानों में योग्य शिक्षकों की कमी पूरी हो सके। अगस्त माह में पटना में शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे वे नई शिक्षा नीति के अनुरूप छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।






छठी से आठवीं के छात्रों का कौशल विकास और ‘नो बैग डे’ पर स्वास्थ्य जागरूकता
शिक्षा विभाग ने छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष जोर देने का निर्णय लिया है। यह कदम छात्रों को शुरुआती स्तर से ही व्यावहारिक ज्ञान और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने में सहायक होगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक शनिवार को मनाए जाने वाले ‘नो बैग डे’ को अब स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए समर्पित किया जाएगा। इस दिन बच्चों को स्वच्छता के महत्व और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियों से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों को सर्वांगीण विकास के लिए तैयार करना है। क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई और कौशल विकास उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ेगा और भविष्य के लिए सशक्त बनाएगा।”
इस योजना के तहत, करीब 2 करोड़ विद्यार्थियों के माध्यम से स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश हर परिवार तक पहुंचाने की व्यापक रणनीति बनाई गई है। यह पहल न केवल स्कूलों में जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि पूरे समाज में स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक बदलाव लाएगी। ये सभी निर्देश बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।








