Bihar Electricity Bill: बिहार में बिहार सरकार की 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना के बावजूद, मुजफ्फरपुर के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल एक नई पहेली बन गया है। कई घरों में हर महीने बिजली बिल में 400 से 500 रुपये तक की राशि ‘माइनस’ में दिख रही है, जिससे लोग असमंजस में हैं कि आखिर मुफ्त बिजली का वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं। उपभोक्ता लगातार सवाल उठा रहे हैं कि इस माइनस बैलेंस का मतलब क्या है और यह क्यों आ रहा है।
क्या है सरकार की मुफ्त बिजली योजना?
राज्य सरकार ने जुलाई 2025 की खपत से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण योजना लागू की है। इस व्यवस्था के तहत, यदि उपभोक्ता की मासिक खपत 125 यूनिट तक रहती है, तो उन्हें ऊर्जा शुल्क में पूरी छूट मिलती है। इसके साथ ही, फिक्स्ड चार्ज और ड्यूटी जैसे मदों में भी छूट का प्रावधान है। यदि खपत 125 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो केवल अतिरिक्त यूनिटों पर ही शुल्क लागू होता है। उदाहरण के लिए, 200 यूनिट की कुल खपत पर, पहली 125 यूनिट को मुफ्त माना जाता है, और शेष 75 यूनिट पर सब्सिडी के बाद बिल तैयार होता है।
बिल में माइनस बैलेंस का क्या है रहस्य?
मुजफ्फरपुर में उपभोक्ताओं के बिल में ‘माइनस’ राशि देखकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, बिजली विभाग के अनुसार, बिल में माइनस आने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि विभाग को उपभोक्ता को पैसा देना है। उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने पहले भी यह स्पष्ट किया है कि यह स्थिति वर्चुअल क्रेडिट, पिछली सब्सिडी का समायोजन या पुराने बकाए की किस्तों में कटौती का परिणाम हो सकती है। कंपनी ने बताया है कि स्मार्ट मीटर का बैलेंस कम होना मुफ्त बिजली योजना के समाप्त होने का संकेत नहीं है, बल्कि यदि कोई पुराना बकाया है, तो सिस्टम उसे किस्तों में धीरे-धीरे काटता रहता है।
क्यों बढ़ रहा है उपभोक्ताओं का भ्रम?
मुफ्त बिजली योजना मुख्य रूप से ऊर्जा शुल्क यानी यूनिट खपत पर लागू होती है। फिक्स्ड चार्ज, ड्यूटी या कोई पुराना बकाया इससे अलग कट सकता है। यही कारण है कि 125 यूनिट से कम बिजली खपत करने वाले कई उपभोक्ता भी शून्य बिल की उम्मीद के बजाय माइनस बैलेंस देखकर हैरान हैं। इसके अलावा, बिलिंग अवधि भी भ्रम का एक बड़ा कारण है। यदि बिलिंग अवधि 30 दिन से ज्यादा या कम होती है, तो मुफ्त यूनिट का हिसाब ‘प्रो-राटा’ यानी दिनों के अनुपात में बदल जाता है। उदाहरण के लिए, 40 दिन के बिल में मुफ्त यूनिट की सीमा 125 नहीं, बल्कि लगभग 167 यूनिट तक बढ़ सकती है। सॉफ्टवेयर में यह गणना स्पष्ट रूप से न दिखने के कारण उपभोक्ताओं में और अधिक भ्रम पैदा हो रहा है।
वहीं, पटना में यातायात जाम से स्थायी राहत दिलाने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत 6 लेन रिंग रोड पर काम को तेज किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार में उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का लाभ तो मिल रहा है, लेकिन बिल में दिख रहे माइनस बैलेंस और जटिल गणनाओं ने उनकी उलझनें बढ़ा दी हैं। विभाग को चाहिए कि वह इस संबंध में उपभोक्ताओं को और अधिक स्पष्ट जानकारी दे, ताकि वे इस योजना का सही अर्थ समझ सकें और अनावश्यक भ्रम से बच सकें।







