East Champaran Flood: पूर्वी चंपारण में गंडक नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। नेपाल में हुई भारी बारिश और वाल्मीकिनगर बराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी ने तबाही मचा दी है। इसी बाढ़ के भयावह मंजर के बीच संग्रामपुर प्रखंड में वन विभाग की टीम ने एक अद्भुत रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
बाढ़ के पानी में बहकर आए दो हिरण और एक हिरण जैसे दिखने वाले घोरपड़ा, जिसे सांभर का बच्चा भी कहा जाता है, को वन विभाग के कर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों ने बताया कि इन वन्यजीवों को अब वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा जाएगा, ताकि वे अपने प्राकृतिक आवास में लौट सकें।
गंडक का कहर: खेत-घर डूबे, तटबंधों पर रात
वाल्मीकिनगर बराज से लगातार भारी पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी के तटीय इलाके त्राहिमाम कर रहे हैं। पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर, केसरिया और पहाड़पुर प्रखंड के कई गांव और दियारा क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। लोगों के घरों में पानी घुसने से उन्हें तटबंधों पर रात काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। ढेकहां और कढ़ान पंचायत के कई वार्ड भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
पश्चिमी चंपारण के बगहा में भी गंडक का जलस्तर खतरनाक ऊंचाई तक पहुंच चुका है। संग्रामपुर में तो पहले से ही गंडक किनारे कटाव का खतरा बना रहता है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
वन विभाग की मुस्तैदी, वन्यजीवों की जान बची
वन विशेषज्ञों के अनुसार, वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व गंडक नदी के किनारे ही फैला हुआ है। नदी में अचानक पानी बढ़ने पर चीतल, सांभर, काकर और जंगली सुअर जैसे शाकाहारी जानवर अक्सर तेज धारा में बह जाते हैं। बाढ़ के दिनों में ऐसी घटनाओं के लिए वन विभाग अपनी रेस्क्यू टीम को हमेशा सतर्क रखता है।
संग्रामपुर में इन हिरणों को बचाना इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है, जो वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन बाढ़ के बीच एक बड़ी राहत लेकर आया है।
आगे क्या? प्रशासन और वन विभाग अलर्ट पर
गंडक की बाढ़ ने एक बार फिर इंसान और वन्यजीव दोनों को संकट में डाल दिया है। संग्रामपुर में हिरणों की जान बचाना निश्चित रूप से एक अच्छी खबर है, लेकिन तटीय गांवों में पानी का दबाव अभी भी बना हुआ है। वाल्मीकिनगर बराज से पानी के लगातार डिस्चार्ज और नेपाल में बारिश की स्थिति पर प्रशासन और वन विभाग दोनों को लगातार अलर्ट मोड में रहना होगा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।







