Bihar Fish Farming Scheme: आर्थिक रूप से कमजोर मछली पालकों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के मत्स्य कृषकों को मछली पालन के लिए भारी अनुदान प्रदान कर रही है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘विशेष घटक पैकेज योजना’ के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे हजारों किसान लाभान्वित होंगे।
मछली पालन योजना: 80% तक की भारी सब्सिडी
इस योजना का मुख्य लक्ष्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के मत्स्य कृषकों को आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। सरकार तालाब निर्माण, बोरिंग पंपसेट/समरसेबुल, ट्यूबवेल या सोलर पंपसेट के अधिष्ठापन, मत्स्य इनपुट, शेड निर्माण और यांत्रिक ऐरेटर जैसी सहायक इकाइयों के लिए एकमुश्त ‘पैकेज सहायता’ प्रदान कर रही है। यह सहायता मछली पालकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और अपनी आय बढ़ाने में मदद करेगी।
योजना को दो प्रमुख घटकों में बांटा गया है, जिनमें अलग-अलग सब्सिडी दरें निर्धारित की गई हैं:
- तालाब मात्स्यिकी विशेष सहायता योजना: इस योजना के तहत प्रति इकाई अधिकतम 10 लाख 10 हजार रुपये की लागत पर 70 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। यह योजना राज्य के सभी जिलों में अनुसूचित जाति, जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों के लिए लागू है।
- पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित योजना: पठारी क्षेत्रों में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए यह योजना लाई गई है। इसमें प्रति इकाई अधिकतम 16 लाख 70 हजार रुपये की लागत पर 80 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह योजना विशेष रूप से दक्षिण बिहार के चिन्हित पठार बाहुल्य जिलों जैसे बांका, औरंगाबाद, गया, कैमूर, नवादा, जमुई, मुंगेर, रोहतास और लखीसराय के एससी/एसटी मत्स्य पालकों के लिए है।
आवेदन के लिए आवश्यक शर्तें और दस्तावेज
दोनों योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास न्यूनतम 0.4 एकड़ जलक्षेत्र की इकाई होनी अनिवार्य है। इसके अलावा, आवेदक के पास निजी भूमि होनी चाहिए या न्यूनतम 09 वर्षों की लीज पर भूमि का होना आवश्यक है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन के साथ भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र (एलपीसी) या अद्यतन मालगुजारी रसीद संलग्न करना होगा। लीज पर भूमि होने की स्थिति में 1,000 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पर लीज एग्रीमेंट प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
अन्य आवश्यक दस्तावेजों में बैंक खाता विवरण, आईएफएससी कोड, जाति प्रमाण पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड/मतदाता पहचान पत्र और जमीन का स्व-अभिप्रमाणित नक्शा शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों को आवेदन के साथ जमा करना होगा।
किसानों के लिए आगे की राह
यह पहल बिहार में मछली पालन को एक लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल संबंधित वर्गों के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि राज्य में मत्स्य उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। इच्छुक मत्स्य कृषक डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की वेबसाइट पर जाकर या संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क कर इस ‘बिहार फिश फार्मिंग स्कीम’ के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायक सिद्ध होगी।







