spot_img

बिहार में बाढ़ से हाहाकार: हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी क्यों उजड़ रहे आशियाने?| CM Samrat ने मांगी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल के लिए वायुसेना से मदद

Bihar Flood: नेपाल की बारिश से गंडक, कोसी, बागमती उफान पर, 6 जिलों में 6 तटबंध टूटे; लाखों लोग प्रभावित, 1987 से 2026 तक की त्रासदी बताती है कि सिर्फ राहत नहीं, स्थायी हल चाहिए।

spot_img
- Advertisement -

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का संकट एक बार फिर गहरा गया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार वर्षा ने बिहार की नदियों में जलस्तर बढ़ा दिया है, जिससे गंडक, कोसी और बागमती उफान पर हैं। वर्ष 2026 की यह स्थिति 6 जिलों के करीब 2.03 लाख लोगों को प्रभावित कर रही है।

- Advertisement -

बिहार के सात जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत पहुंचाने के लिए CM सम्राट चौधरी ने वायुसेना से मदद मांगी है। वहीं, पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर सीएम सम्राट ने आज निरीक्षण किया।

- Advertisement -

बिहार में बाढ़ से हाहाकार: हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी क्यों उजड़ रहे आशियाने?| CM Samrat ने मांगी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल के लिए वायुसेना से मदद

- Advertisement -

गंडक के तेज बहाव के कारण इन 6 जिलों में 6 तटबंध टूट गए हैं, जिससे लाखों लोगों के सामने विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। यह हर साल की कहानी है, जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गांवों का डूबना और आशियानों का उजड़ना जारी है। आंकड़े के अनुसार करीब पौने तीन लाख लोग बाढ़ के बीच घिरे हुए हैं।लगातार बढ़ते जलस्तर और कई इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने से राहत एवं बचाव कार्यों के सामने चुनौती बढ़ गई है।

बिहार के सात जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत पहुंचाने के लिए CM सम्राट चौधरी ने वायुसेना से मदद मांगी है। वहीं, पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर सीएम सम्राट ने आज निरीक्षण किया।

बिहार में बाढ़ का भयावह मंजर: दशकों पुरानी समस्या

बाढ़ की भयावहता सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। सारण के मकेर में गंडक की तेज धार में दो तेंदुए बहते हुए दिखाई दिए, जिनमें से एक तैरकर किनारे पहुंचा और पेड़ पर चढ़ गया, जबकि दूसरा पानी के साथ आगे बह गया। बगहा के ठकराहा के भवानी टोला में भी एक मगरमच्छ घर में घुस गया, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।

यह भी पढ़ें:  Gaya Murder गया में 50 साल की मूक-बधिर विधवा की नग्न लाश, क्या रेप के बाद सिलेंडर से ली जान? कमरे में चारों तरफ खून और गहरे निशान!

बिहार में बाढ़ से हाहाकार: हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी क्यों उजड़ रहे आशियाने?| CM Samrat ने मांगी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल के लिए वायुसेना से मदद

पटना से बेगूसराय और खगड़िया तक गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है, जिससे पटना के कई घाट फिर से जलमग्न हो गए हैं और बेगूसराय में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यह सिर्फ 2026 की बात नहीं है, बिहार में बाढ़ का इतिहास दशकों पुराना है और यह राज्य के लिए एक स्थायी संकट बन गया है।

बिहार देश के सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित राज्यों में से एक है। राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 68,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बाढ़ प्रभावित माना जाता है। इसका अर्थ है कि राज्य का करीब 73 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्र में आता है। उत्तर बिहार की स्थिति और भी गंभीर है, जहां लगभग 76 प्रतिशत आबादी बाढ़ के खतरे वाले इलाकों में रहती है। बिहार की बाढ़ सिर्फ स्थानीय बारिश से नहीं आती, बल्कि कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान, बूढ़ी गंडक, अधवारा और महानंदा जैसी कई नदियों का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और हिमालयी इलाकों में है। इसलिए, अगर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश होती है, तो उसका पानी तेजी से बिहार की ओर आता है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ता है और तटबंधों पर दबाव पड़ता है। उत्तर प्रदेश, झारखंड और कुछ अन्य इलाकों में होने वाली बारिश भी बिहार की नदियों को प्रभावित करती है।

आंकड़ों में बिहार की बाढ़: 1987 से अब तक की त्रासदी

बिहार के बाढ़ इतिहास में कई भयावह अध्याय दर्ज हैं, जो हर साल लौटते संकट की गवाही देते हैं:

  • 1987: 30 जिले और 24,518 गांव प्रभावित हुए। 1,399 लोगों की मौत हुई और 5,000 से अधिक जानवर मारे गए। फसलों को लगभग 678 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  • 1998: बूढ़ी गंडक, बागमती, अधवारा और कोसी के तटबंधों को नुकसान पहुंचा। 381 लोगों की मौत हुई और फसलों को 36,696.68 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
  • 1999: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में असामान्य बारिश के कारण कमला बलान में अचानक बाढ़ आई। फसलों को 24,203.88 लाख रुपये और सार्वजनिक संपत्ति को 5,409.99 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
  • 2000: कमला बलान और भूतही बलान के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। अगस्त में पूर्वी कोसी तटबंध टूट गया, जिससे 12,351 गांव और 33 जिले प्रभावित हुए। 336 लोगों की जान गई।
  • 2002: उत्तर बिहार में बाढ़ से 25 जिले प्रभावित हुए। 489 लोगों की मौत हुई और फसलों को 51,149.61 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
  • 2004: उत्तर बिहार की नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जुलाई के पहले सप्ताह से भारी बारिश हुई। बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, भूतही बलान और अधवारा नदी समूह में स्थिति बिगड़ी। बागमती में दुब्बाधार के पास जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर से 1.18 मीटर ऊपर पहुंच गया। 53 तटबंध टूटे, 9,346 गांव और दो करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। 885 लोगों की मौत हुई, 3,272 जानवर मारे गए। फसलों को 522 करोड़ रुपये और सार्वजनिक संपत्ति को 1,030 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
  • 2007: लगभग सभी प्रमुख नदी बेसिनों में भारी बारिश हुई। बूढ़ी गंडक और बागमती बेसिन में जलस्तर बढ़ता गया। 28 जगहों पर तटबंधों में दरारें पड़ीं। 22 जिले प्रभावित हुए, 2.4 करोड़ लोग बाढ़ की चपेट में आए। 1,287 लोगों की मौत हुई और 2,400 से अधिक जानवर मारे गए। लगभग एक करोड़ हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ।
  • 2008 (कोसी बाढ़): 18 अगस्त 2008 को नेपाल के कुशहा के पास पूर्वी कोसी तटबंध में दरार आई। कोसी ने अपना रास्ता बदल लिया, जिससे नेपाल के सुनसरी और सप्तरी के साथ बिहार के सुपौल, मधेपुरा, अररिया, सहरसा, कटिहार और पूर्णिया तक पानी फैल गया। 50 लाख लोग प्रभावित हुए और 258 लोगों की मौत हुई।
  • 2013: 20 जिले प्रभावित हुए, 59 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए और 200 से अधिक लोगों की मौत हुई।
  • 2016: गंगा की भीषण बाढ़ ने 15 जिलों को प्रभावित किया, 88 लाख लोग प्रभावित हुए और 228 लोगों की मौत हुई।
  • 2017: उत्तर बिहार के 19 जिलों में बड़ी बाढ़ आई, जिससे 1.7 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए और 514 लोगों की मौत हुई।
  • 2019: सीतामढ़ी और मधुबनी समेत 13 जिलों में बाढ़ आई, 85.6 लाख लोग प्रभावित हुए और 130 से अधिक लोगों की मौत हुई।
  • 2020: कोरोना महामारी के बीच बाढ़ ने संकट और बढ़ा दिया। 19 जिलों में एक करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए।
  • 2021 से 2023: दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और उत्तर बिहार के अन्य जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी रही।
  • 2024: नेपाल के बराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद उत्तर बिहार के कई इलाकों में स्थिति बिगड़ी। 11.84 लाख लोग प्रभावित हुए।
  • 2025: बाढ़ ने 47 लाख लोगों को प्रभावित किया और 26 से अधिक लोगों की मौत हुई।
यह भी पढ़ें:  Bihar Cabinet का बड़ा फैसला! सम्राट कैबिनेट का 30 एजेंडों को मंजूरी, जानिए आपको क्या मिलेगा?

करोड़ों खर्च के बाद भी हर साल क्यों टूटते हैं तटबंध?

बिहार में बाढ़ नियंत्रण की सबसे बड़ी चुनौती तटबंधों की स्थिति है। नदियों का जलस्तर बढ़ने पर इन पर दबाव बढ़ता है और नेपाल से अचानक अधिक पानी आने पर स्थिति और मुश्किल हो जाती है। कई बार नदी का बहाव बदलता है, कटाव बढ़ता है और तटबंध कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे वे टूट जाते हैं और पानी तेजी से आसपास के गांवों में फैल जाता है। वर्ष 2026 में भी गंडक के तेज बहाव से 6 तटबंधों का टूटना इसी कहानी को दोहरा रहा है। सारण के मकेर में मुख्य तटबंध लगभग 160 फीट टूट गया, गोपालगंज के बैकुंठपुर में जमींदारी बांध ध्वस्त हो गया और पश्चिम चंपारण में भी तीन जगहों पर तटबंध टूटे।

यह भी पढ़ें:  पटना सिटी में गंगा का रौद्र रूप: घरों में घुसने का खतरा, भद्र घाट और महावीर घाट की सड़कें पानी में!

बाढ़ से बचाव के लिए सरकार हर साल बड़ी रकम खर्च करती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक बाढ़ सुरक्षा पर 5,100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। वर्ष 2026 में भी बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के लिए लगभग 1,117 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली है, जिसमें 384 परियोजनाओं पर काम कराने की बात कही गई है।

‘सवाल यह नहीं है कि बाढ़ पर पैसा क्यों खर्च हो रहा है। सवाल यह है कि इतना खर्च होने के बाद भी हर साल वही तस्वीर क्यों लौट आती है? मानसून आते ही तटबंधों की चिंता क्यों बढ़ जाती है? नदियों का जलस्तर बढ़ते ही गांवों में डर क्यों फैल जाता है? और सबसे बड़ा सवाल… अगर हर साल तटबंध मजबूत किए जा रहे हैं, करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं और बाढ़ नियंत्रण की योजनाएं बन रही हैं, तो फिर लाखों लोगों को हर साल राहत शिविरों और ऊंची सड़कों का सहारा क्यों लेना पड़ता है?’

यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सिर्फ राहत सामग्री बांटने या टूटे तटबंधों की मरम्मत तक सीमित समाधान पर्याप्त नहीं हैं। जब तक नदी के पूरे बेसिन को समझकर व्यापक और स्थायी समाधान पर काम नहीं होगा, तब तक हर मानसून में यह सवाल लौटता रहेगा। बिहार को हर साल बाढ़ से लड़ने की नहीं, बल्कि बाढ़ के स्थायी समाधान की जरूरत है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Gaya Murder गया में 50 साल की मूक-बधिर विधवा की नग्न लाश, क्या रेप के बाद सिलेंडर से ली जान? कमरे में चारों तरफ...

Gaya Murder: गया में 50 वर्षीय मूक-बधिर विधवा का नग्न शव मिलने से सनसनी फैल गई है। आशंका है कि रेप के बाद गैस सिलेंडर से हमला कर उसकी हत्या की गई है। पुलिस जांच में जुटी है। #GayaCrime,#BiharPolice,#MurderInvestigation

हवा में ‘ आतंकी ‘ खून-खराबा: फ्लाइट में को-पायलट का कैप्टन पर चाकू से हमला, 14000 फीट नीचे गिरा विमान, 174 यात्रियों की जानिए...

Flydubai incident: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में बुधवार, 30 सितंबर को खूनी संघर्ष हुआ। को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे विमान 14,000 फीट न #FlydubaiIncident,#MidAirChaos,#TabukAirport

Madhepura Murder मधेपुरा में खूनी खेल! घर के पास टेंट मजदूर को मारी 2 गोलियां, ऑन द स्पॉट मौत

Madhepura Murder: मधेपुरा में देर रात एक टेंट मजदूर बबलू मेहता की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घर से 100 मीटर पहले सीने में दो गोलियां मारी गईं। #MadhepuraMurder,#BiharCrime,#ChausaNews

छठ पर घर आ रहे हैं? आपके लिए खुशखबरी! समस्तीपुर रेल मंडल ने बनाया ‘मास्टर प्लान’, अब नहीं होगी प्लेटफार्म पर भीड़ की भगदड़

Samastipur Rail Mandal: समस्तीपुर रेल मंडल ने छठ महापर्व के लिए 13 प्रमुख स्टेशनों पर 50 लाख रुपये की लागत से अस्थायी होल्डिंग एरिया बनाने का नया प्लान तैयार किया है। इससे लाखों यात्रि #SamastipurRail,#ChhathPuja,#BiharNews