Bihar Flood: मॉनसून के बीच बिहार में नदियों का मिजाज तेजी से बदल रहा है। जहां एक ओर गंगा और गंडक नदियों का जलस्तर स्थिर बना हुआ है, वहीं कोसी और सोन नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जल संसाधन विभाग की ओर से बुधवार सुबह नौ बजे तक जारी आंकड़ों ने बाढ़ के खतरे को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।

गंगा नदी का जलस्तर अब भी लगभग सभी स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। खासकर सुल्तानगंज में गंगा नदी उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, पटना जिले के हाथीदह तक गंगा के जलस्तर में मामूली कमी देखी गई है, लेकिन मुंगेर से साहिबगंज तक सभी घाटों पर गंगा का जलस्तर स्थिर बना हुआ है। यह स्थिति निचले इलाकों के लिए अभी भी चुनौती बनी हुई है।
बाढ़ से हाहाकार: बिहार में 40 लाख लोग फंसे, पटना में टूटा 15 फीट बांध, क्या आप सुरक्षित हैं?
Bihar Flood News: पूरे बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां कई नदियां उफान पर हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 14 जिलों में 40 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसी बीच, पटना जिले में पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर ने नई चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके परिणामस्वरूप बढ़हईया कोल बांध का एक हिस्सा टूट गया है।
पटना में टूटा बांध, बढ़ाई मुसीबत
राजधानी पटना से सटे इलाकों में पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था, जिससे बढ़हईया कोल बांध पर भारी दबाव पड़ रहा था। पानी के तेज बहाव के कारण बांध का लगभग 15 फीट चौड़ा हिस्सा अचानक टूट गया। बांध टूटने के साथ ही बाढ़ का पानी तेजी से आसपास के रिहायशी इलाकों और खेतों में फैल गया, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग और पटना जिला प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बांस और रेत से भरी बोरियों का उपयोग कर पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। इस अस्थायी उपाय का उद्देश्य पानी के फैलाव को रोकना और स्थानीय लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना है।
14 जिले प्रभावित, बिहार बाढ़ की स्थिति गंभीर
बिहार में बाढ़ का प्रकोप वर्तमान में 14 जिलों तक फैला हुआ है, जिसमें कुल 82 प्रखंड और 514 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 40.21 लाख आबादी बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, कोसी और सोन जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में कुछ कमी देखी गई है, जो राहत की बात है।
हालांकि, गंडक नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है, जबकि पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभिन्न नदियों की अलग-अलग स्थिति राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की चुनौतियों को जटिल बना रही है। बाढ़ से प्रभावित प्रमुख जिलों में शामिल हैं:
- पटना
- भोजपुर
- सारण
- वैशाली
- भागलपुर
- बेगूसराय
- बक्सर
- समस्तीपुर
- मुंगेर
- कटिहार
- लखीसराय
- खगड़िया
- पूर्णिया
- अरवल
फिलहाल, प्रशासन का मुख्य ध्यान टूटे हुए बांध की मरम्मत करने और प्रभावित क्षेत्रों में पानी के फैलाव को रोकने पर केंद्रित है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौके पर एक हवलदार को भी तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। पुनपुन नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि इसका बढ़ना बांधों और तटबंधों पर और दबाव डाल सकता है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
कोसी और सोन में फिर चढ़ा पानी, बढ़ रही चिंता
बुधवार सुबह नौ बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, इंद्रपुरी बराज से सोन नदी का डिस्चार्ज 80,511 क्यूसेक दर्ज किया गया। सुबह आठ बजे के मुकाबले इसमें बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, वीरपुर बराज से कोसी नदी का डिस्चार्ज 1,44,200 क्यूसेक दर्ज किया गया, जिसमें सुबह आठ बजे की तुलना में वृद्धि हुई है। इन दोनों प्रमुख नदियों में जलस्तर का बढ़ना बिहार के कई जिलों में बाढ़ की आशंका को फिर से मजबूत कर रहा है।
दूसरी ओर, वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी का डिस्चार्ज 86,000 क्यूसेक दर्ज किया गया, जिसमें फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। गंडक में जलप्रवाह स्थिर बना हुआ है, जो थोड़ी राहत की बात है।
क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत युद्धस्तर पर जारी
बढ़ते जलस्तर के कारण जिन बांधों और तटबंधों को नुकसान पहुंचा था, वहां मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी है। भागलपुर जिले के राघोपुर में क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। वहीं, सारण जिले के घूरघु कोठिया गांव में माही नदी के दायें तटबंध पर हुए कटाव स्थल को भी दुरुस्त कर दिया गया है। जल संसाधन विभाग लगातार राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ तटबंधों की निगरानी कर रहा है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके। विभाग के अधिकारी चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।








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