नेपाल पुलिस ने बाढ़ पीड़ितों की राहत सामग्री लूटी? मिला करारा जवाब, कहा- ‘बचाव कार्य में बाधा’ | पढ़िए – हौंसला कायम है!
Nepal Flood Relief: भयानक बाढ़ के बाद चल रहे बचाव कार्यों के बीच राहत सामग्री रोके जाने के आरोपों ने हंगामा खड़ा कर दिया है। नेपाल पुलिस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें सुरक्षाकर्मियों का मनोबल गिरा रही हैं और आपदा प्रबंधन में रुकावट पैदा कर रही हैं।
Nepal Flood Relief: नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा रोके जाने या सड़ा देने के आरोपों पर नेपाल पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए जनता से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें। इन आरोपों के कारण नेपाल बाढ़ राहत कार्यों में लगे सुरक्षाकर्मियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
विपक्षी नेता सीपीएन (UML) के सचिव महेश बस्नेत ने आरोप लगाया था कि राहत सामग्री सेना और पुलिस की बैरकों और कार्यालयों में रखी जा रही है, और कुछ खाना सड़ने के लिए छोड़ दिया गया है।
नेपाल पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाकर बेबुनियाद और भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले महीने आई भयानक बाढ़ के बाद से नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान लगातार खोज, बचाव और राहत कार्यों में मुस्तैदी से जुटे हुए हैं।
राहत सामग्री रोकने और सड़ाने के आरोप बेबुनियाद: पुलिस
पुलिस के बयान के मुताबिक, सेना और पुलिस पर राहत सामग्री कब्जे में लेने या उसे सड़ने के लिए छोड़ने के आरोप पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी, जिससे भोटेकोशी नदी उफान पर थी। इस प्राकृतिक आपदा में उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए थे। जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
बुधवार तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,365 हो गई है, जबकि 5,326 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों के जवान फंसे और प्रभावित लोगों को बचाने, लापता लोगों की तलाश करने, घायलों को इलाज दिलाने, शवों की देखभाल करने और राहत सामग्री बांटने जैसे महत्वपूर्ण कामों में लगे हैं।
अफवाहों से बचाव कार्य में बाधा और मनोबल पर असर
नेपाल पुलिस ने चेतावनी दी कि आपदा के दौरान बिना पुष्टि किए फैलाए जा रहे आरोपों से बचाव और राहत कार्य में जुटे सुरक्षा कर्मियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। ऐसी अफवाहें जनता के बीच सुरक्षा एजेंसियों के प्रति अविश्वास भी पैदा कर सकती हैं, जिससे संवेदनशील आपदा प्रबंधन कार्यों में गंभीर रुकावटें आ सकती हैं। अखबार ‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, नेपाल पुलिस ने यह भी साफ किया कि उसके पास कोई राहत सामग्री रखी हुई नहीं है। पुलिस ने जनता और सभी संबंधित लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहें या अपुष्ट खबरें ना फैलाएं, जिनसे भ्रम पैदा हो या राहत कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मियों का हौसला कमजोर पड़े।
महेश बस्नेत ने यह भी आरोप लगाया था कि बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टरों को उड़ान भरने से रोका गया। उन्होंने आपदा से निपटने के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और स्वयंसेवी संगठन हामी नेपाल की भी आलोचना की थी। नेपाल सरकार, पुलिस और सेना ने इन सभी अफवाहों और आरोपों को गलत बताया है। गौरतलब है कि बिहार में भी नेपाल से बहकर आई मछलियों को न खाने की एडवाइजरी जारी की गई थी, जिससे यह पता चलता है कि बाढ़ का असर सीमा पार भी देखा गया।
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