Bihar Makhana Labor Death: बिहार के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में एक 15 वर्षीय मखाना मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। घटहरा मुसहरी में हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान सुपौल के उसराही निवासी मिथिलेश सदा के रूप में हुई है, जिसके पिता ने मखाना केंद्र संचालक और एक झोलाछाप डॉक्टर पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है।

गरीबी का बोझ और काम के दौरान दर्द
मिथिलेश सदा अपने परिवार की मदद के लिए कम उम्र में ही काम करने लगा था। उसके पिता विनोद सदा ने बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस में बिलखते हुए बताया कि उनका बेटा घटहरा मुसहरी में 8 हजार रुपये मासिक वेतन पर मखाना फोड़ने का कार्य करता था। मिथिलेश छह बहनों का इकलौता भाई था और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। मंगलवार शाम को काम करते समय अचानक उसके पेट में तेज दर्द उठा।
झोलाछाप डॉक्टर का इलाज और लापरवाही का आरोप
पेट में दर्द उठने के बाद मखाना केंद्र संचालक ने मिथिलेश को अस्पताल ले जाने के बजाय एक झोलाछाप डॉक्टर को बुलाया। इस डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन दिया और कुछ दवाएं भी खिलाईं। इलाज के कुछ ही देर बाद मिथिलेश की मौत हो गई। पिता विनोद सदा ने आरोप लगाया कि यदि उनके बेटे को समय पर सही उपचार मिलता, तो उसकी जान बच सकती थी।
‘अस्पताल में भर्ती कराकर सही से उपचार होता तो मिथिलेश की जान बच सकती थी। इसके बावजूद मखाना संचालक ने ऐसा नहीं किया।’
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
घटना की सूचना मिलने पर घनश्यामपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
पुलिस की प्राथमिक जांच में इसे ‘नेचुरल मृत्यु’ माना जा रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ पाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों के बढ़ते प्रभाव और गरीब मजदूरों के स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।








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