Darbhanga PDS: बिहार के दरभंगा जिले में जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के अनाज की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिनुआरा पंचायत के PDS डीलर अरुण कुमार पासवान के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई तब हुई जब उनके गोदाम से 78.35 क्विंटल सरकारी अनाज गायब मिला।
आरोप है कि डीलर ने लाखों रुपये के गेहूं और चावल का गबन किया है। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अनियमितता का खुलासा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका था, जिसके बाद पुलिस-प्रशासन की नींद खुली है। इस देरी को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और लाभुकों में गहरा आक्रोश है, जो व्यवस्था पर लगातार तीखे सवाल दाग रहे हैं।
एक साल तक क्यों सोता रहा प्रशासन?
अरुण कुमार पासवान के गोदाम की जांच 6 सितंबर 2025 को की गई थी। उसी समय स्टॉक में भारी अंतर पाया गया था। जांच रिपोर्ट अनुमंडल पदाधिकारी, सदर दरभंगा को सौंपी गई और डीलर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। हालांकि, इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। डीलर ने अपने बचाव में ‘मनगढ़ंत जवाब’ दिया, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया।
बावजूद इसके, अनुज्ञप्ति संख्या 03/2016 को रद्द करने और एफआईआर दर्ज करने में पूरे एक साल का वक्त लग गया। अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश (ज्ञापांक-2191 दिनांक 1 सितंबर 2026) के बाद जाकर एपीएम थाना में बीएसओ मुरारी प्रसाद सिंह के आवेदन पर मामला दर्ज किया गया। इस लंबी लेटलतीफी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: ‘बड़े चेहरों’ पर कब कसेगी नकेल?
स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि जब सितंबर 2025 में ही इतनी बड़ी कमी पकड़ी जा चुकी थी, तो एफआईआर दर्ज कराने और लाइसेंस रद्द करने में पूरा एक साल क्यों गंवाया गया? क्या इस दौरान भ्रष्ट डीलर को बचाने या साक्ष्य मिटाने का मौका दिया जा रहा था?
इस प्रशासनिक ढुलमुल रवैये से स्थानीय ग्रामीण और लाभुक बेहद नाराज हैं। वे जानना चाहते हैं कि आखिर इतने बड़े घोटाले के पीछे कौन-कौन से ‘बड़े चेहरे’ शामिल हैं। थानाध्यक्ष सह केस अनुसंधानकर्ता ने बताया कि एमओ के आवेदन पर मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पुलिस जांच से खुलेंगे कई राज
पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने की तैयारी में है, जो गरीबों के हक का राशन खुले बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा था। जांच के बाद यह सामने आ सकता है कि इस कालाबाजारी में सिर्फ डीलर ही नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर भी कौन-कौन से लोग शामिल थे। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिला पाएगी और गरीबों के निवाले पर डाका डालने वालों पर नकेल कसी जाएगी।







