Bihar Flood News: बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच राजधानी पटना में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। गंगा, पुनपुन और दरधा समेत कई नदियां उफान पर हैं, जिसने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। खासकर पुनपुन नदी ने हालात को चिंताजनक बना दिया है, जिसका जलस्तर 2019 के रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।
गंगा, गंडक, सोन, पुनपुन समेत अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर से प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है
▶️पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुंगेर और कटिहार समेत 12 जिलों की 10 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है।
▶️तटबंधों पर दबाव बना हुआ है और कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
▶️केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गंगा के जलस्तर में आंशिक कमी आई है।
▶️सोन, घाघरा, बूढ़ी गंडक, बागमती और कोसी नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
पुनपुन नदी का रौद्र रूप: 2019 का रिकॉर्ड टूटा
पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान 50.60 मीटर से करीब 2.86 मीटर ऊपर 53.46 मीटर दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा 2019 के 53.44 मीटर के स्तर को भी पार कर चुका है और नदी के पुराने उच्चतम स्तर के बेहद करीब है। पुनपुन का बढ़ता पानी पटना के निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा है, जिससे कई सड़कें और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। मसौढ़ी सहित नदी के आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटना में गंगा, पुनपुन और सोन नदियों के बढ़े जलस्तर का असर अब 11 प्रखंडों तक पहुंच चुका है।
रेल परिचालन पर भीषण असर: गर्डर तक पहुंचा पानी
पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर ने रेल यातायात को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। पटना-गया रेलखंड पर स्थित पुनपुन और परसा बाजार के बीच ब्रिज नंबर-21 के गर्डर तक पानी पहुंच गया है। यात्रियों और रेलवे ढांचे की सुरक्षा को देखते हुए इस महत्वपूर्ण हिस्से की डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। 7 सितंबर को पटना-गया, गया-पटना और पटना-राजगीर रूट की 10 MEMU ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है। इस बदलाव से पटना, गया, राजगीर, इस्लामपुर और आसपास के यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे ने यात्रियों को घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह दी है।
3.19 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में, 500 घर डूबे
पटना जिले में बाढ़ की स्थिति भयावह है, जहां तीनों प्रमुख नदियों के पानी से करीब 3.19 लाख की आबादी प्रभावित है। गंगा के पानी से लगभग 2 लाख, पुनपुन से 1.1 लाख और सोन नदी से करीब 21 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं। मोकामा, अथमलगोला, फतुहा और मनेर जैसे इलाकों में बाढ़ का सबसे अधिक असर दिख रहा है। इन प्रखंडों की 44 पंचायतों के साथ-साथ बख्तियारपुर नगर परिषद के तीन वार्डों में भी पानी फैल गया है। पुनपुन शहर के करीब 500 घरों में बाढ़ का पानी घुसने की खबर है, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का ताजा स्टेटस अवश्य जांच लें, क्योंकि हालात सामान्य होने तक ट्रेनों के परिचालन में बदलाव जारी रह सकता है।
सड़कें जलमग्न, आवागमन बाधित
बाढ़ के पानी ने कई प्रमुख सड़कों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। मोकामा, अथमलगोला और बख्तियारपुर में पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी पहुंच गया है। मोकामा के शिवनार और बहपुर तथा अथमलगोला के सबनीमा में पुराने एनएच-31 पर करीब दो फीट पानी बह रहा है। हाथीदह के महेंद्रपुर गांव के पास एनएच-80 पर भी बाढ़ का पानी फैल गया है। बख्तियारपुर के रबाईच में जेएमटी स्कूल के पास एसएच-106 पर करीब तीन फीट पानी जमा है, जबकि नया टोला राघोपुर और रानीसराय के आसपास भी सड़क पर पानी की तेज धार बह रही है। पुनपुन पिंडदान स्थल जाने वाली सड़क पर भी करीब एक फीट पानी बह रहा है।
ग्रामीण इलाकों में हाहाकार
पुनपुन के पानी से बरावां, लखनपार, पैमार, लखना उत्तर-पश्चिम, लखना पूर्वी और बेहरावां जैसी छह पंचायतें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं, जिससे इन इलाकों की करीब 20 हजार आबादी प्रभावित है। मसौढ़ी के भगवानगंज-देवरिया मार्ग पर भी लगभग दो फीट पानी बह रहा है। गंगा का पानी बख्तियारपुर शहरी क्षेत्र में भी प्रवेश कर गया है, जिससे रबाईच और रानीसराय की ओर से शहर में पानी आने के कारण करीब 10 वार्ड बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। निचले इलाकों की सड़कों और गलियों में पानी भरने से लोगों की परेशानी चरम पर है।








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