BSP Funds: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की वित्तीय स्थिति हैरान करने वाली है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि 2024-25 वित्तीय वर्ष में BSP ने 58.58 करोड़ रुपये की कमाई की है। यह आंकड़ा तब सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में पार्टी का कोई विधायक या सांसद नहीं है, खासकर उमाशंकर सिंह के निधन के बाद यह संख्या शून्य हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह एक बड़ा सवाल है कि पार्टी को इतने पैसे कहां से मिल रहे हैं, जबकि उसकी चुनावी ताकत कमजोर हुई है।
अरबों की संपत्ति, करोड़ों की कमाई: कहां से आता है BSP के पास पैसा?
चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार, मार्च 2024 में BSP के फंड में कुल 739 करोड़ रुपये थे, हालांकि मार्च 2025 तक यह घटकर 666 करोड़ रुपये रह गए। 31 मार्च 2025 तक पार्टी के पास 61.52 करोड़ रुपये की भौतिक संपत्ति भी थी। इस संपत्ति में 23.40 करोड़ रुपये की इमारतें, 9.99 करोड़ रुपये के फ्लैट और घर, 1.76 करोड़ रुपये की जमीन, 5.65 करोड़ रुपये के फर्नीचर और फिक्स्ड आइटम, और 13.30 करोड़ रुपये की गाड़ियां शामिल हैं। पार्टी ने अपने पैसे आठ अलग-अलग बैंक खातों में जमा कर रखे हैं।
साल 2024-25 में BSP की कुल आय 58.58 करोड़ रुपये रही। इसमें से 12.30 करोड़ रुपये पार्टी की सदस्यता से मिले, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 26.59 करोड़ रुपये था। आय का एक बड़ा हिस्सा, 46.28 करोड़ रुपये, पार्टी के बैंक खातों में जमा पैसों पर मिले ब्याज से आया। इसके अलावा, पार्टी को अपनी संपत्ति बेचने से भी 1.41 करोड़ रुपये मिले।
20 साल का रिकॉर्ड टूटा: BSP ने क्यों नहीं बताया बड़े चंदे का हिसाब?
ADR रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। BSP ने बताया है कि उसे 2024-25 में 20 हजार रुपये से ऊपर का कोई चंदा नहीं मिला। यह पिछले 20 सालों में पहली बार हुआ है, क्योंकि पिछले 19 सालों से पार्टी नियमित रूप से 20 हजार से अधिक के चंदे का विवरण देती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, छह राष्ट्रीय दलों को कुल 11343 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जिसमें से 6648.563 करोड़ रुपये का चंदा 20 हजार से अधिक की श्रेणी में था। BSP का यह नया रवैया राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
चुनाव में BSP का खर्च और भविष्य की चुनौतियां
वित्तीय वर्ष 2024-25 में BSP ने कुल 106 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसकी कुल कमाई 58.58 करोड़ रुपये से 47.71 करोड़ रुपये अधिक है। इसमें से 84.46 करोड़ रुपये चुनावों पर खर्च हुए, जबकि 21.04 करोड़ रुपये सामान्य खर्च और पार्टी के कामकाज पर लगे। अन्य खर्च 64 लाख रुपये का था। कमाई से अधिक खर्च और फंड में कमी आना, भविष्य में पार्टी के लिए वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियां खड़ी कर सकता है, खासकर तब जब पार्टी राजनीतिक रूप से कमजोर स्थिति में है।







