Bihar Health News: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को जिला स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसी क्रम में, सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, जमुई, मधुबनी और पूर्वी चंपारण के सदर अस्पतालों की स्थिति का जायजा लिया गया।
बैठक के दौरान, अस्पतालों में 70 प्रकार की विभिन्न सर्जरी शुरू करने, चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने और गहन चिकित्सा इकाई (ICU) सहित अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों को उनके गृह जिले में ही उच्च गुणवत्ता वाला इलाज मुहैया कराना और अनावश्यक रूप से बड़े शहरों या निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने की प्रवृत्ति को कम करना है।






जिला अस्पतालों में मिलेंगी 70 प्रकार की सर्जरी
स्वास्थ्य विभाग की यह समीक्षा बैठक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से संचालित हुई, जिसमें विभाग के विशेष सचिव डॉ. त्यागराजन एस. एम., राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय और बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में विभिन्न जिलों के अस्पतालों की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया।
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने जानकारी दी कि बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय-3 योजना के तहत सभी सदर अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और आवश्यक मानव संसाधन सुनिश्चित करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला अस्पतालों को इस स्तर तक उन्नत करना है, जहाँ अधिकांश मरीजों को सामान्य और जटिल सर्जरी के लिए निजी क्लीनिकों या महानगरों की ओर न देखना पड़े।
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि मरीजों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिले और उन्हें छोटी-मोटी बीमारियों के लिए बाहर न जाना पड़े। 70 प्रकार की सर्जरी शुरू करना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।”
आपातकालीन सेवाएं और आईसीयू की व्यवस्था
समीक्षा के दौरान, सभी सिविल सर्जनों को निर्देशित किया गया कि चिह्नित 70 प्रकार की सर्जिकल सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाए। जिन अस्पतालों में अभी सीमित सर्जरी हो रही है, वहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ और ऑपरेशन थिएटर की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा गया। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक जिले में उपचार की गुणवत्ता और सर्जरी की संख्या दोनों में वृद्धि करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
बैठक में हड्डी रोग, सामान्य सर्जरी और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के लिए अलग-अलग ऑपरेशन थिएटरों को 24×7 संचालित करने पर विशेष बल दिया गया। इसके अतिरिक्त, आईसीयू और वेंटिलेटर को पूरी तरह से कार्यशील रखने और सभी अस्पतालों में ट्रायज प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि गंभीर मरीजों का समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। स्वास्थ्य सचिव ने अस्पतालों में एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य आधुनिक सर्जिकल उपकरणों की उपलब्धता की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी अस्पताल में उपकरणों या संसाधनों की कमी है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए, ताकि निर्धारित सभी सर्जिकल सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो सकें और मरीजों को इसका पूरा लाभ मिल सके।








