Bihar Legislative Council: छठ महापर्व के तुरंत बाद बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य विधान परिषद में आठ नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। विधान परिषद सचिवालय ने इन सभी नए सदस्यों को सदन की सदस्यता दिलाने के लिए राज्यपाल की मंजूरी का प्रस्ताव भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार, 18 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है, हालांकि इस तारीख पर अंतिम मुहर राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही लगेगी।

वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है, ऐसे में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी करने की कवायद जारी है। इस बार विधान परिषद में कई ऐसे चेहरे भी नहीं दिखेंगे, जो लंबे समय से सदन की कार्यवाही का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पूरी तरह बदल गया प्रतिनिधित्व
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाले नतीजे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चारों सीटों से आए हैं। इन सभी सीटों पर निवर्तमान विधान पार्षदों को हार का सामना करना पड़ा है, जिससे सदन में अब बिल्कुल नए चेहरे नजर आएंगे। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नवल किशोर यादव भी इनमें शामिल हैं, जो पिछले 30 वर्षों से बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। उनके चुनाव हारने से एक लंबा राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया है।
‘विधान परिषद सचिवालय ने नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण का प्रस्ताव राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया है। 18 नवंबर को शपथ ग्रहण संभावित है, अंतिम निर्णय राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही होगा।’
ये दिग्गज भी नहीं दिखेंगे सदन में
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. मदन मोहन झा भी इस बार विधान परिषद में नहीं दिखेंगे। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में उनका भी एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है, लेकिन चुनाव में मिली हार के बाद उनकी सदस्यता का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। इसी तरह, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाकपा के संजय सिंह और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निवर्तमान सदस्य मो. अफाक अहमद को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
इन चुनावों के नतीजों ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चारों सीटों पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। शपथ ग्रहण के बाद ये सभी नए सदस्य औपचारिक रूप से विधान परिषद की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाएंगे। यह बदलाव बिहार विधान परिषद में एक नई ऊर्जा और नई दिशा का संकेत दे रहा है।







