Bihar Clone Check Fraud: बिहार में क्लोन चेक के जरिए 2.72 करोड़ रुपये की हाईटेक ठगी ने बैंकिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेल्ट्रॉन के खाते से महज 23 दिनों के भीतर 56 क्लोन चेक के माध्यम से यह बड़ी राशि अवैध रूप से निकाल ली गई। इस सनसनीखेज पटना क्लोन चेक फ्रॉड मामले की जांच शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने तेज कर दी है।

बदमाशों ने क्लोन चेक तैयार करने में इतने हाईटेक तरीकों का इस्तेमाल किया कि बैंक को इसकी भनक तक नहीं लगी। लगातार चेक पास होते रहे और रकम ट्रांसफर होती रही। बाद में यह राशि कैश या एटीएम कार्ड के जरिए निकाल ली गई।

कैसे हुआ 2.72 करोड़ का हाईटेक खेल?
इस बड़ी ठगी को अंजाम देने वाले गिरोह ने साधारण फोटोकॉपी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने हाई-एंड यूवी स्कैनर, वेक्टर री-ड्रॉइंग सॉफ्टवेयर और ऑफसेट लिथोग्राफी तकनीक का सहारा लिया। ठगों ने बेल्ट्रॉन के मूल चेक के वाटरमार्क, माइक्रो-टेक्स्ट और इनविजिबल फ्लोरोसेंट इंक पैटर्न को नागपुर की एक एजेंसी में स्कैन कर लिया था।
इसके बाद, इंडियन ओवरसीज बैंक के विशेष फॉन्ट और माइकर (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्निशन) बैंड की डिजिटल मैपिंग की गई। इसका ब्लूप्रिंट कानपुर स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस को भेजा गया। वहां ऑफसेट प्लेट्स तैयार की गईं और चेक के निचले हिस्से पर छपे 9 अंकों का विशेष कोड भी हूबहू उतार लिया गया, जिससे क्लोन चेक पूरी तरह असली प्रतीत होने लगे।
कानपुर और नागपुर जाएगी पटना पुलिस की स्पेशल टीम
इस हाईप्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए पटना पुलिस की एक विशेष टीम जल्द ही कानपुर और नागपुर के लिए रवाना होगी। पुलिस इस बात का पता लगाएगी कि नागपुर की एजेंसी से बदमाशों ने चेक का ब्लूप्रिंट कैसे हासिल किया। इसके साथ ही, कानपुर की प्रिंटिंग प्रेस में भी जाकर पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी।
दरअसल, नागपुर की एक एजेंसी के पास इंडियन ओवरसीज बैंक की चेकबुक छापने का जिम्मा था। एजेंसी द्वारा चेकबुक छापने के बाद उसे स्पीड पोस्ट के जरिए बेल्ट्रॉन के रजिस्टर्ड पते पर भेजा जाना था, लेकिन पार्सल मिलने से पहले ही शातिर गिरोह ने इस पूरे खेल को अंजाम दे दिया। जब तक इस जालसाजी का खुलासा हुआ, तब तक बेल्ट्रॉन के खाते से 2.72 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाली जा चुकी थी। इस संबंध में शास्त्रीनगर थाने में आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
पुरानी ठगी से अलग, शातिरों ने अपनाया नया तरीका
खास बात यह है कि इस बार गिरोह ने क्लोन चेक बनाने के लिए साधारण कागज के बजाय बॉन्ड पेपर और केमिकल-सेंसिटिव इंक की मदद ली थी। इससे पहले इस तरह के गिरोह सामान्य कागज पर ही क्लोन चेक तैयार कर पैसों की निकासी कर लेते थे, लेकिन बैंकों की कड़ी निगरानी बढ़ने के बाद इस तरह के अवैध धंधे पर काफी हद तक रोक लग गई थी। काफी लंबे समय बाद इस तरह का मामला सामने आया है, जिसमें बेहद शातिराना तरीके से क्लोन चेक के माध्यम से किसी खाते से इतनी बड़ी रकम की अवैध निकासी की गई है। पुलिस की जांच इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।







