Bihar Minimum Wage: पटना में बिहार के साढ़े तीन करोड़ से अधिक असंगठित और संगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है. राज्य के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने न्यूनतम मजदूरी दरों में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की है. इस बढ़ोतरी के बाद मजदूरों को अब रोजाना 7 से 10 रुपये तक अधिक मिलेंगे.

यह नई मजदूरी दरें बीते 1 अक्टूबर से ही प्रभावी मानी जाएंगी, हालांकि इसकी अधिसूचना मंगलवार को जारी हुई है. राज्य के कुल कामगारों में लगभग 90 प्रतिशत, यानी 3.26 करोड़ से अधिक श्रमिक असंगठित क्षेत्र से जुड़े हैं, जिन्हें इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा. विभाग ने कामगारों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा है.
किस श्रेणी के कामगारों को कितना फायदा?
विभाग की अधिसूचना के अनुसार, अकुशल श्रेणी में आने वाले 31 तरह के कामगारों की न्यूनतम मजदूरी में रोजाना 7 रुपये की वृद्धि की गई है. इसी तरह, अर्धकुशल श्रेणी में शामिल 40 तरह के कामगारों को भी रोजाना 7 रुपये अधिक मिलेंगे. कुशल श्रेणी के 50 तरह के कामगारों की न्यूनतम मजदूरी में रोजाना 9 रुपये का इजाफा किया गया है, जबकि अतिकुशल श्रेणी के 21 तरह के कामगारों को सबसे ज्यादा 10 रुपये रोजाना की वृद्धि का लाभ मिलेगा.
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा:
‘नई मजदूरी दर एक अक्तूबर से ही प्रभावी होगी। न्यूनतम मजदूरी में 7 से 10 रुपए रोजाना की वृद्धि की गई है। अब कामगारों को पहले की तुलना में अधिक पैसा मिलेगा जिससे उन्हें सुविधा होगी।’
विभाग आमतौर पर साल में दो बार, 1 अक्टूबर और 1 अप्रैल को नई मजदूरी दरें लागू करता है. तकनीकी कारणों से इस बार 1 अक्टूबर को दरें नहीं बढ़ाई जा सकी थीं, लेकिन अब जारी अधिसूचना उसी तारीख से प्रभावी होगी.
शिकायत कैसे करें और नियोक्ताओं पर कितना जुर्माना?
राज्य सरकार ने पहली बार सभी श्रेणियों के कामगारों को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाया है. इसमें शिक्षक, नर्स या अन्य अतिकुशल कामगार भी शामिल हैं, जिन्हें न्यूनतम 17,732 रुपये मासिक मजदूरी मिलनी अनिवार्य है. विभाग ने स्वीकार किया है कि बिहार में निजी स्कूलों या अस्पतालों में अक्सर इन नियमों का पालन नहीं होता है.
यदि किसी कामगार को न्यूनतम मजदूरी का लाभ नहीं मिल रहा है, तो वे इसकी शिकायत कर सकते हैं. शिकायत के लिए प्रखंडों में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, जिलों में श्रम अधीक्षक, या पटना में नियोजन भवन स्थित विभागीय मुख्यालय में संपर्क किया जा सकता है. जांच में मामला सही पाए जाने पर नियोक्ताओं पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. विभाग ने एक टोल-फ्री नंबर 155214 भी जारी किया है और जल्द ही न्यूनतम मजदूरी की निगरानी के लिए एक पोर्टल भी लॉन्च करेगा.
खेती-किसानी से जुड़े मजदूरों की भी बढ़ी मजदूरी
विभाग ने कृषि क्षेत्र के कामगारों के लिए भी मजदूरी दरें निर्धारित की हैं. कटनी (फसल काटने) कार्य को छोड़कर अन्य कृषि कार्यों के लिए दैनिक मजदूरी 413 रुपये से बढ़ाकर 419 रुपये रोजाना कर दी गई है. ट्रैक्टर ड्राइवर और पंप ऑपरेटर का मासिक वेतन 14,947 रुपये से बढ़कर 15,180 रुपये हो गया है. इसी तरह, ट्रैक्टर खलासी का मासिक वेतन 11,633 रुपये से बढ़ाकर 11,814 रुपये किया गया है. कटनी के काम में, काटी गई फसल के 10 बोझा में से एक बोझा मजदूरी के रूप में देने का नियम तय किया गया है.
| श्रेणी | पुरानी दैनिक दर (रुपये) | नई दैनिक दर (रुपये) |
|---|---|---|
| अकुशल | 436 | 443 |
| अर्धकुशल | 452 | 459 |
| कुशल | 551 | 560 |
| अतिकुशल | 672 | 682 |
यह वृद्धि राज्य के लाखों कामगारों के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाएगी.








