Bihar Flight Ticket Price: बिहार समेत पूरे देश में त्योहारों, छुट्टियों या किसी आपात स्थिति के दौरान हवाई टिकटों की कीमतें अचानक आसमान छूने लगती हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में दावा किया गया कि कुछ मुख्य रूटों पर सामान्य दिनों के मुकाबले हवाई किराया दो से सात गुना (लगभग 700%) तक बढ़ गया है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, लेकिन अब केंद्र सरकार हवाई किरायों की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी में है।

केंद्र सरकार ने ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से पूरी तरह लागू होंगे। इन नए नियमों के तहत, सरकार को असाधारण परिस्थितियों में जनहित में एयरलाइंस को किराये से जुड़े लिखित निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। यह कदम यात्रियों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने और किराये में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘डायनामिक प्राइसिंग’ का मायाजाल और सरकारी दखल का इतिहास
भारत में मार्च 1994 में ‘एयर कॉर्पोरेशंस एक्ट’ रद्द होने के बाद से एयरलाइंस को अपना किराया खुद तय करने की पूरी छूट मिली हुई है। कंपनियां ‘डायनामिक प्राइसिंग’ मॉडल पर काम करती हैं, जिसका सीधा मतलब है कि जैसे-जैसे सीटें भरती हैं या यात्रा की तारीख करीब आती है, टिकट महंगे होते चले जाते हैं। जब यह किराया आम लोगों की पहुंच से बाहर होने लगता है, तो सरकार के हस्तक्षेप का सवाल उठता है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत सरकार के पास हवाई किराये पर नियंत्रण रखने का अनुभव रहा है। कोविड महामारी के दौरान (मई 2020 से अगस्त 2022 तक) सरकार ने घरेलू उड़ानों की दूरी और समय के हिसाब से न्यूनतम और अधिकतम किराये की सीमा तय की थी। न्यूनतम सीमा एयरलाइंस को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए थी, जबकि अधिकतम सीमा यात्रियों को ‘लूट’ से बचाने के लिए लगाई गई थी। इसी तरह, दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानें बड़े पैमाने पर रद्द होने और यात्रियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने पर, सिविल एविएशन मंत्रालय ने 6 दिसंबर 2025 को तुरंत अस्थायी अधिकतम किराया सीमा लागू की थी, जिसे 23 मार्च 2026 को स्थिति सामान्य होने पर हटाया गया। ये उदाहरण साबित करते हैं कि संकट के समय सरकार के पास दखल देने का पूरा अधिकार है।
2027 से बदलेंगे नियम: नए ‘भारतीय वायुयान नियम’ से क्या होगा?
केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 को ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इन नियमों का नियम 192 हवाई किराये से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान करता है:
- एयरलाइंस को बुकिंग के समय बेस फेयर, टैक्स, कैंसिलेशन चार्ज और अन्य शुल्कों की पूरी जानकारी साफ-साफ देनी होगी।
- कंपनियों को अपनी किराया संरचना DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के पास जमा करनी होगी।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति बनी है, तो वह जनहित में एयरलाइंस को किराये से जुड़े लिखित निर्देश जारी कर सकती है।
‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ के नियम 192 के तहत, सरकार को असाधारण स्थिति में जनहित में एयरलाइंस को किराये से जुड़े लिखित निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। इससे मनमानी कीमत वसूली पर प्रभावी ढंग से लगाम लग सकेगी।
दुनिया में क्या है व्यवस्था और भारत के लिए आगे की राह
दुनिया के अन्य देशों में भी एयरलाइंस को किराया तय करने की आजादी है, लेकिन वहां पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों पर सख्त नियम हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में 1978 के ‘एयरलाइन डिरेगुलेशन एक्ट’ के तहत बाजार ही किराया तय करता है, लेकिन ‘यूएस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन’ यह सुनिश्चित करता है कि एयरलाइंस भ्रामक विज्ञापन न दें या एकाधिकार बनाकर लोगों को न ठगें। यूरोपीय संघ (EU) में नियम 1008/2008 के तहत कंपनियों को किराया तय करने की छूट है, लेकिन बुकिंग के समय कुल अंतिम कीमत, अनिवार्य टैक्स, बैगेज चार्ज और एयरपोर्ट शुल्क छिपाना गैरकानूनी है। ब्रिटेन में ‘सिविल एविएशन अथॉरिटी’ (CAA) के पास उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और भ्रामक जानकारी देने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार हैं।
भारत में फिलहाल DGCA की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट (TMU) देश के 78 मुख्य रूटों पर किरायों की रैंडम जांच करती है। हालांकि, इसका काम केवल यह देखना होता है कि एयरलाइन अपनी तय और घोषित किराया सीमा के भीतर ही टिकट बेच रही है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को एक ऐसे स्वतंत्र ‘एविएशन रेगुलेटर’ की जरूरत है जो सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा देखने वाली संस्था (CCI) से अलग होकर केवल यात्रियों के आर्थिक हितों और किराये में पारदर्शिता पर नजर रख सके।
हवाई किराये पर स्थायी तौर पर कैप लगाने के फायदे और नुकसान दोनों हैं। फायदे के तौर पर देखें तो त्योहारों या संकट के समय यात्रियों (जैसे मरीजों, छात्रों और अचानक यात्रा करने वालों) को बड़ी राहत मिलेगी। नुकसान यह है कि यदि सरकार बहुत कम किराया तय कर देगी तो एयरलाइंस के लिए महंगे एविएशन फ्यूल और परिचालन खर्चों के बीच उड़ानें चलाना नुकसान का सौदा बन जाएगा, जिससे कई रूटों पर उड़ानें बंद हो सकती हैं। समाधान पूरे साल किराया बांधने में नहीं, बल्कि एक संतुलित नीति में है, जहां सामान्य दिनों में बाजार को किराया तय करने दिया जाए, लेकिन त्योहारों, प्राकृतिक आपदाओं या उड़ानों में गड़बड़ी के समय सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर अधिकतम सीमा तय करे। 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नए नियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।







