Bihar MLA: मुजफ्फरपुर की साहेबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक राजू सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हर्ष फायरिंग मामले में उनकी सजा पर तत्काल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग तेज हो गई है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है।
इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने राजू सिंह को इस आपराधिक मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के कारण राजू सिंह की विधायकी पर कानूनी तलवार लटक गई है।
राजू सिंह को क्यों मिली थी सजा?
यह पूरा मामला 31 दिसंबर 2018 का है, जब दिल्ली के एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी चल रही थी। आरोप है कि इस दौरान हुई हर्ष फायरिंग में एक महिला आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में गोली लग गई थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस गंभीर घटना की सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने बीजेपी विधायक राजू सिंह को आर्म्स एक्ट और गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था।
अदालत ने राजू सिंह को चार साल की जेल और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ विधायक राजू सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली।
विधायकी रद्द करने की मांग, क्या कहता है कानून?
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा पर रोक नहीं लगाए जाने के बाद अब राजू सिंह की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ के प्रावधानों के तहत, यदि किसी जन प्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। इसी आधार पर बिहार विधानसभा सचिवालय से राजू सिंह की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की जा रही है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और विधानसभा के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।







