Bihar Child Safety: बिहार में अब बच्चों को पुलिस थाने में जाने से डरने की जरूरत नहीं होगी। राज्य पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी थानों में ‘चाइल्ड हेल्प डेस्क’ या ‘चाइल्ड कॉर्नर’ स्थापित करने का निर्देश दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे और उनके परिवार बिना किसी भय के अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर पुलिस के पास आ सकें और उन्हें एक सुरक्षित व बाल-सुलभ वातावरण मिल सके।
अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की कमजोर वर्ग शाखा ने इस महत्वपूर्ण कदम को उठाया है। यह निर्णय बिहार पुलिस अधिनियम और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। इसका लक्ष्य बच्चों से जुड़े मामलों को अधिक संवेदनशीलता से निपटाना और उन्हें सहायता के लिए एक निर्दिष्ट बिंदु उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था को 2 अक्टूबर 2026 तक राज्य के सभी पुलिस थानों में लागू किया जाना है।
पुलिस थानों में बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल
चाइल्ड हेल्प डेस्क या चाइल्ड कॉर्नर पुलिस स्टेशन परिसर के भीतर एक ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाएगा जो आसानी से दिखाई दे और सुलभ हो। इस निर्दिष्ट क्षेत्र को नियमित हवालात से अलग रखा जाएगा, ताकि बच्चों को पुलिस कर्मियों के साथ बातचीत करने के लिए अधिक उपयुक्त और तनावमुक्त माहौल मिल सके। यह सुविधा चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर (CWPO) के नेतृत्व में काम करेगी।
केंद्र पर CWPO और संबंधित जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे बच्चे और उनके अभिभावक जरूरत पड़ने पर आसानी से नामित अधिकारियों से संपर्क कर सकेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी या डर का सामना न करना पड़े।
शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई और महिला पुलिस की तैनाती
इस नई व्यवस्था में लड़कियों से संबंधित मामलों में हस्तक्षेप और सहायता के लिए उपयुक्त महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती भी शामिल होगी। इसका उद्देश्य बच्चों के लिए संचार को आसान बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि लड़कियों से जुड़े मामलों को पुलिस स्टेशन के भीतर उचित सहायता मिले। पुलिस स्टेशनों को बच्चों और उनके अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों और सहायता अनुरोधों पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
चाइल्ड हेल्प डेस्क पर प्रदर्शित संपर्क नंबर सक्रिय रहने चाहिए, ताकि लोग जरूरत पड़ने पर नामित अधिकारियों तक पहुंच सकें। शिकायतों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाया जाएगा और उनके निपटान को ट्रैक करने के लिए उचित रिकॉर्ड बनाए जाएंगे। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
उच्चाधिकारी करेंगे चाइल्ड हेल्प डेस्क की निगरानी
चाइल्ड हेल्प डेस्क के कामकाज की नियमित रूप से वरिष्ठ जिला पुलिस अधिकारियों द्वारा निगरानी की जाएगी। निगरानी तंत्र में पुलिस उपाधीक्षक, विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) प्रभारी और अन्य वरिष्ठ जिला-स्तरीय अधिकारी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं और पुलिस कर्मी बच्चों और उनके परिवारों से निपटते समय बाल-संवेदनशील प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं।
बिहार के सभी पुलिस थानों को गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 तक चाइल्ड हेल्प डेस्क या चाइल्ड कॉर्नर स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। जिला अधिकारियों को 5 अक्टूबर 2026 तक कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह पहल पुलिस स्टेशनों के भीतर बच्चों के लिए सुरक्षा, सहायता या हस्तक्षेप मांगने के लिए एक समर्पित और सुलभ तंत्र स्थापित करने का इरादा रखती है।
यह पहल बिहार में बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। पुलिस स्टेशनों को बाल-सुलभ बनाने और शिकायतों को संवेदनशीलता से निपटाने से बच्चों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगा। 2 अक्टूबर 2026 की समय सीमा तक सभी थानों में इन डेस्क के स्थापित होने के बाद, यह देखना होगा कि यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और किस प्रकार बच्चों को न्याय दिलाने में सहायक बनती है।






