Bihar Politics: बिहार में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की शिवहर से लोकसभा सांसद लवली आनंद ने दिल्ली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से दूरी बना ली। लवली आनंद के शिवहर में मौजूद होने के बावजूद दिल्ली नहीं जाने से कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं।
लवली आनंद की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई अटकलें
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में थे और उन्होंने बिहार के विकास के मुद्दों पर चर्चा के लिए जेडीयू सांसदों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सांसद संजय कुमार झा, देवेश चंद्र ठाकुर, सुनील कुमार और कौशलेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। हालांकि, लवली आनंद की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में मुख्य चर्चा का विषय बन गया है।
आनंद मोहन की नाराजगी और नई पार्टी की सुगबुगाहट
लवली आनंद के बैठक से गैरहाजिर रहने के बाद उनके पति और पूर्व सांसद आनंद मोहन के अगले राजनीतिक कदम को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि आनंद मोहन जेडीयू नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। उनका यह रुख पिछले कुछ समय से देखने को मिल रहा है, जिसके कारण उनके द्वारा एक नई पार्टी बनाने की चर्चा ने फिर से जोर पकड़ लिया है।
एनडीए गठबंधन में कई राजपूत नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। पूर्व मंत्री आरके सिंह, जय कुमार सिंह और नीरज सिंह बबलू जैसे नेताओं की नाराजगी की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।
एनडीए में राजपूत नेताओं की कथित उपेक्षा
आरोप है कि आनंद मोहन इन्हीं नाराज नेताओं का मन टटोलने के लिए इन दिनों बिहार का दौरा कर रहे हैं। अगर आनंद मोहन कोई नया राजनीतिक मोर्चा बनाते हैं, तो इससे बिहार के एनडीए गठबंधन को नुकसान हो सकता है। राजपूत समुदाय के नाराज नेताओं का एक साथ आना राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है।
बिहार के सियासी समीकरण पर संभावित असर
आनंद मोहन के संभावित कदम का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और गठबंधन की एकजुटता पर पड़ सकता है। आनंद मोहन का राजनीतिक इतिहास हमेशा से संघर्षों भरा रहा है। उन्होंने साल 1993 में जनता दल से अलग होकर ‘बिहार पीपुल्स पार्टी’ का गठन किया था। इसके बाद उनकी पत्नी लवली आनंद ने 1994 का वैशाली उपचुनाव भी जीता था। अब एक बार फिर बिहार में उनके नए सियासी प्रयोग की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसका असर राज्य की बिहार राजनीति पर दिख सकता है।







