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Bihar Politics RJD Crisis राजद में ‘दीमक’ और ‘अपमान’ का बड़ा भूचाल! इस्तीफे के बाद अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मृत्युंजय तिवारी से की मुलाकात, क्या लालू बचा पाएंगे पार्टी?

Bihar RJD Crisis: राष्ट्रीय जनता दल में इस्तीफों के बाद मचे सियासी घमासान के बीच एक अहम मुलाकात हुई है। वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मृत्युंजय तिवारी से मिलकर उन्हें पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से बात करने का रास्ता सुझाया है, जिससे बिहार राजद संकट गहरा गया है।

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Bihar RJD Crisis: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच शुक्रवार सुबह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मृत्युंजय तिवारी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले ही सिद्दीकी ने राजद के मुख्य प्रवक्ता पद समेत अपनी सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया था। इस बैठक को Bihar RJD Crisis के संभावित समाधान या नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

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सूत्रों के अनुसार, अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मृत्युंजय तिवारी को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करने की सलाह दी है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे से राजद के अंदर नई राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, और इस मुलाकात को मौजूदा घटनाक्रम में सबसे अहम माना जा रहा है।

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राजद में ‘दीमक’ वाले बयान से भूचाल! अब्दुल बारी सिद्दीकी ने अचानक की मृत्युंजय तिवारी से मुलाकात

Bihar RJD: राजद में आंतरिक घमासान तेज हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने शुक्रवार सुबह पूर्व मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब गुरुवार को तिवारी ने अपने पद समेत सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों के अनुसार, सिद्दीकी ने मृत्युंजय तिवारी को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मिलने की सलाह दी है, जिससे पार्टी के भीतर मची हलचल और बढ़ गई है।

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मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद से ही राजद के राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। तिवारी ने पार्टी के भीतर ‘सम्मान न मिलने’ और संगठन की ‘दिशाहीन कार्यशैली’ पर गंभीर सवाल उठाए थे, जिसके अगले ही दिन यह अहम बैठक हुई है।

‘दीमक’ और ‘अपमान’ का आरोप, राजद में बड़ा संकट

मृत्युंजय तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए संगठन पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वह अब ऐसी पार्टी में नहीं रहना चाहते, जहां उन्हें सम्मान न मिले। तिवारी ने स्पष्ट कहा कि संगठन दिशाहीन हो गया है और कुछ लोग इतने प्रभावशाली हो चुके हैं कि टिकट से लेकर पद तक के फैसलों पर उनका सीधा प्रभाव दिखाई देता है।

मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “कुछ लोग संगठन के लिए ‘दीमक’ की तरह काम कर रहे हैं और इसी कारण जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच रही।”

उन्होंने यह भी बताया कि जब पार्टी सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब लालू प्रसाद यादव ने उन पर भरोसा जताया था और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। तिवारी ने दावा किया कि उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। भागलपुर के रहने वाले मृत्युंजय तिवारी 2014 में लालू प्रसाद यादव द्वारा पार्टी के मीडिया प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए थे। छात्र राजनीति से ही वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं।

सिद्दीकी की मुलाकात और आगे की राह

अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात के बाद मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बातचीत हुई है और आगे क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई बातचीत होती है तो उसे देखा जाएगा, जिससे संवाद की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गुरुवार को इस्तीफा देते समय तिवारी ने अपना त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को सौंपा था। उन्होंने तब कहा था कि वह अब पार्टी में और अधिक अपमान सहन नहीं कर सकते और वर्षों तक निष्ठा से काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कई बार शिकायत के बावजूद उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।

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फिलहाल, राजद नेतृत्व की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक सूत्रों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि मृत्युंजय तिवारी के अगले राजनीतिक कदम पर सभी दलों की नजर है, हालांकि उनके किसी अन्य दल में शामिल होने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अब्दुल बारी सिद्दीकी की मध्यस्थता के बाद क्या मृत्युंजय तिवारी की लालू प्रसाद यादव से मुलाकात होती है या नहीं, क्योंकि यही बैठक राजद के भीतर चल रहे इस घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।

अपमान और दिशाहीन संगठन: मृत्युंजय तिवारी का दर्द

गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा देने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने संगठन की कार्यशैली और पार्टी के भीतर सम्मान न मिलने पर गंभीर सवाल उठाए थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वह अब ऐसी पार्टी में नहीं रहना चाहते, जहां उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिले। तिवारी ने राजद के संगठन को ‘दिशाहीन’ करार दिया।

मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “संगठन दिशाहीन हो गया है और कुछ लोग इतने प्रभावशाली हो चुके हैं कि टिकट से लेकर पद तक के फैसलों पर उनका प्रभाव दिखाई देता है। मैंने कभी पार्टी से किसी पद या टिकट की मांग नहीं की। कठिन दौर में भी संगठन के साथ खड़ा रहा, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि लालू प्रसाद यादव ने जब पार्टी सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब उन पर भरोसा जताया था और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। तिवारी के अनुसार, उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

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‘दीमक’ लगे संगठन की शिकायत, कार्यकर्ताओं की अनसुनी आवाज

मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के भीतर कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संगठन के लिए ‘दीमक’ की तरह काम कर रहे हैं। इस कारण जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे पार्टी को बड़ा नुकसान हो रहा है। उन्होंने गुरुवार को अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को सौंपते हुए कहा था कि वर्षों तक पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।

इस्तीफा देते समय मृत्युंजय तिवारी ने कहा था, “मैं अब पार्टी में और अधिक अपमान सहन नहीं कर सकता। कई बार शिकायत करने के बावजूद मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।”

सिद्दीकी से हुई मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि ‘बातचीत हुई है और आगे क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘यदि कोई बातचीत होती है तो उसे देखा जाएगा।’ यह बयान संवाद की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज नहीं करता।

आगे क्या? लालू यादव से मुलाकात पर टिकी निगाहें

भागलपुर के रहने वाले मृत्युंजय तिवारी लंबे समय से राजद का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वर्ष 2014 में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी का मीडिया प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था। छात्र राजनीति से सक्रिय सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाले तिवारी ने वर्षों तक पार्टी की ओर से राजनीतिक मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई और युवाओं के बीच संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भागीदारी निभाई।

फिलहाल, मृत्युंजय तिवारी के अगले कदम पर सभी राजनीतिक दलों की नजर है, हालांकि उनके किसी अन्य दल में शामिल होने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि अब्दुल बारी सिद्दीकी की सलाह के बाद क्या मृत्युंजय तिवारी की लालू प्रसाद यादव से मुलाकात होती है। यदि ऐसा होता है, तो यह राजद के भीतर चल रहे इस घटनाक्रम की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है। पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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