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भारत ने कर दिखाया! दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन अब हमारे पास, जर्मनी-चीन भी छूटे पीछे | राजेश कुमार बने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट

Hydrogen Train India: भारतीय रेलवे ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की है। यह ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली और अधिक यात्री क्षमता वाली है, जो हरित परिवहन में भारत की बड़ी उपलब्धि है।

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Hydrogen Train India: भारत ने हरित और स्वच्छ रेल परिवहन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। देश ने अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया है, जो जर्मनी और चीन जैसे देशों में चल रही हाइड्रोजन ट्रेनों से कहीं अधिक उन्नत है। यह ट्रेन भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी दक्षता का एक बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से जींद-सोनीपत रेलखंड पर इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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भारतीय रेलवे की यह पहल देश को हरित ऊर्जा आधारित परिवहन में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करती है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता का भी प्रतीक है।

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राजेश कुमार बने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट

हरियाणा के जींद से शुरू हुई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पहली बार चलाने का सौभाग्य लोको पायलट राजेश कुमार व सहायक लोको पायलट गगनदीप सिंह को मिला। दोनो कर्मचारियों ने कई माह की ट्रेनिंग के बाद आज कमान संभाली। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें आज का यह सफर जीवन भर याद रहेगा।

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भारत की हरित क्रांति: हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें

भारत की यह नई Hydrogen Train India में कई मायनों में अनूठी है। इसमें कुल 10 डिब्बे हैं और यह 1,200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रणाली से चलती है। इसकी अधिकतम परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिससे यह यात्रियों को तेजी से उनके गंतव्य तक पहुंचा सकेगी। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनाती है, जिसका एकमात्र उत्सर्जन जलवाष्प (वॉटर वेपर) होता है। इस विशेषता के कारण यह लगभग शून्य-कार्बन उत्सर्जन वाली पर्यावरण अनुकूल रेल सेवा बन जाती है, जो वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक होगी।

भारतीय रेलवे के अनुसार, दुनिया के कई देशों में अभी दो या तीन डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेनें ही परिचालन में हैं, जबकि भारत ने 10 डिब्बों वाली ट्रेन विकसित की है, जो करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। क्षमता और शक्ति के लिहाज से इसे दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों माना जा रहा है।

जींद में बना देश का सबसे बड़ा स्टेशन, ‘मेक इन इंडिया’ की मिसाल

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हरियाणा के जींद में भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा हाइड्रोजन ईंधन भरने का स्टेशन स्थापित किया गया है। यह स्टेशन ट्रेन के नियमित परिचालन के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा प्रदान करेगा और यहीं से ट्रेन में हाइड्रोजन की आपूर्ति की जाएगी। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस ट्रेन को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है। रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने इसके तकनीकी मानक और डिजाइन तैयार किए हैं, जो भारत की आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

भारतीय रेलवे भविष्य में ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ परियोजना के तहत देश के अन्य रेलखंडों, विशेषकर विरासत और पर्वतीय मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन की योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि भारतीय रेल को आधुनिक और टिकाऊ परिवहन के वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाएगी।

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दिल्ली तक चलाया जाएगा

रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने शुक्रवार को ऐलान किया कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का निकट भविष्य में विस्तार करते हुए दिल्ली तक चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में जींद में देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन जनता को समर्पित किए जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि वर्तमान में यह ट्रेन जींद से सोनीपत तक चलेगीरेल मंत्रालय की तरफ से सोनीपत से दिल्ली रेल लाइन पर हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण शुरू हो चुका है। बहुत जल्द परीक्षण कार्य पूरा होने के बाद हाइड्रोजन ट्रेन का विस्तार करके जींद से दिल्ली तक चलाया जाएगा। यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जाएगी।

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