Bihar The Vvaan Controversy: बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत फिल्म ‘The Vvaan’ रिलीज से पहले ही बड़े विवादों में घिर गई है। बिहार के बिहटा में स्थित प्रसिद्ध वन देवी मंदिर और ‘वनदेवीः माता विंध्यवासिनी विराजमान’ पुस्तक के लेखक, वरिष्ठ पत्रकार प्रियरंजन भारती ने फिल्म की कहानी पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर बिना उचित शोध के धार्मिक इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है, जिससे स्थानीय लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है।
‘मुंबई की जल्दबाजी ने सब गुड़-गोबर कर दिया’
पत्रकार प्रियरंजन भारती ने ‘The Vvaan’ के मेकर्स के काम पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा है कि फिल्म बनाने वालों ने बिहटा के अमहरा में मौजूद वन देवी मंदिर का वास्तविक इतिहास जाने बिना ही कहानी गढ़ दी।
उनका कहना है कि यदि मेकर्स मुंबई की आपाधापी से निकलकर थोड़ी रिसर्च कर लेते या मंदिर में लगे बोर्ड को ही पढ़ लेते, तो शायद इतनी बड़ी गलती नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि जल्दबाजी के कारण मेकर्स ने सब काम खराब कर दिया है।
“मुंबई की जल्दबाजी में मेकर्स ने सब गुड़-गोबर कर दिया। The Vvaan बनाने वालों ने बिहटा के अमहरा में मौजूद वन देवी मंदिर का असली इतिहास जाने बिना ही फिल्म बना दी। अगर वे मुंबई की आपाधापी से निकलकर थोड़ी रिसर्च कर लेते या मंदिर में लगा बोर्ड ही पढ़ लेते, तो शायद ऐसी बड़ी गलती नहीं होती। जल्दबाजी के चक्कर में मेकर्स ने सब काम खराब कर दिया है।”
सात्विक देवी को डरावना दिखाना आस्था का अपमान
प्रियरंजन भारती ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 1975 से 2005 तक इस पवित्र स्थान पर घने अंधेरे और दुर्गम रास्तों से गुजरकर माता की आराधना की है। वे कहते हैं कि यह माता विंध्यवासिनी का अत्यंत शांत और पवित्र बाल रूप है।
इस घने जंगल में भी सांप या अजगर जैसे खतरनाक जीव किसी को नुकसान नहीं पहुँचाते। ऐसे सात्विक और शांतिपूर्ण रूप को फिल्म में डरावना और अजीब दिखाना करोड़ों लोगों की आस्था का सीधा अपमान है।
रामनगर राघवपुर और मंदिर का वास्तविक इतिहास
लेखक ने माता के प्रकट होने का ऐतिहासिक विवरण भी दिया। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज पं. विद्यानंद मिश्र ने वर्षों तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता बाल रूप में प्रकट हुईं और अमहरा के अशोक वन में विराजमान हो गईं। बाद में इस स्थान को ‘रामनगर राघवपुर’ के नाम से जाना जाने लगा, जिसे स्थानीय लोग ‘छोटी काशी’ भी कहते हैं। इस गौरवशाली इतिहास का उल्लेख कई बड़े विद्वानों और इतिहासकारों ने अपनी पुस्तकों में किया है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर विवाद पर सिद्धार्थ मल्होत्रा या फिल्म के निर्देशक क्या प्रतिक्रिया देते हैं।








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