Pappu Pandey: बिहार के गोपालगंज जिले में सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय की कानूनी मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं। जिले की विशेष MP-MLA कोर्ट ने उन्हें और उनके दो परिजनों को करीब सात साल पुराने एक जानलेवा फायरिंग के मामले में आरोपी मानते हुए आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला साल 2019 में मीरगंज थाना क्षेत्र में हुई एक घटना से जुड़ा है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
जानलेवा हमले का 7 साल पुराना मामला
कुचायकोट विधानसभा सीट से जदयू विधायक पप्पू पांडेय के खिलाफ यह गंभीर मामला मीरगंज थाना क्षेत्र के नयागांव तुलसिया सिंगहा टोला से संबंधित है। करीब सात साल पहले इस इलाके में एक बड़ी आपराधिक वारदात हुई थी। स्थानीय निवासी फूलमती कुंवर ने साल 2019 में पुलिस थाने में एक नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे अभिमन्यु तिवारी पर जान से मारने की नीयत से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस जानलेवा हमले की साजिश और क्रियान्वयन में सीधे तौर पर विधायक पप्पू पांडेय और उनके परिजनों का नाम सामने आया था। पीड़ित परिवार लंबे समय से इस मामले में न्याय की गुहार लगा रहा था।
पुलिस की चार्जशीट और कोर्ट का फैसला
घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की गहराई से तहकीकात शुरू कर दी थी। पुलिस की स्पेशल टीम ने घटनास्थल से कई अहम सुराग जुटाए थे और गवाहों के बयान दर्ज किए थे। लंबी तफ्तीश के बाद पुलिस ने अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। जांच अधिकारियों ने विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय, उनके बाहुबली भाई सतीश पांडेय और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रह चुके भतीजे मुकेश पांडेय के खिलाफ मजबूत साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल की थी। इसी चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए अब विशेष अदालत ने तीनों हाई-प्रोफाइल आरोपितों पर आधिकारिक तौर पर आरोप तय कर दिए हैं।
इस मामले में आरोप तय होने के बाद जदयू विधायक पप्पू पांडेय और उनके परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू होगी, जिससे उनकी राजनीतिक छवि पर भी असर पड़ सकता है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों में भी नजर रखी जा रही है।







