Nepal Rescue Team: भूकंप जैसी किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य सबसे पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन नेपाल ने पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी विदेशी रेस्क्यू टीम को अपने यहां आने की इजाजत नहीं देगा। इस बड़े फैसले के पीछे चीन का लगातार दबाव बताया जा रहा है। भारत ने सबसे पहले नेपाल को एनडीआरएफ की टीम भेजने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन नेपाल ने इस पेशकश को ठुकरा दिया।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार को सूचित किया था कि उसे भारतीय बचाव दल की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, नेपाल ने राहत सामग्री स्वीकार करने पर सहमति जताई थी, लेकिन किसी भी देश की रेस्क्यू टीम को अनुमति नहीं दी। सूत्रों के मुताबिक, नेपाल के इस रुख के पीछे चीन का लगातार दबाव काम कर रहा है, जो नहीं चाहता कि विदेशी सैनिक या खुफिया एजेंट उसकी सीमा से सटे इलाकों में प्रवेश करें।
नेपाल ने भारत की मदद को क्यों कहा ‘ना’? चीन के दबाव में लिया गया ये चौंकाने वाला फैसला!
Nepal China Border: काठमांडू: विनाशकारी आपदा से जूझ रहे नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी, जिसमें भारत द्वारा प्रस्तावित मदद भी शामिल थी। इस फैसले के पीछे चीन का लगातार दबाव बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, चीन को आशंका है कि बचाव अभियान की आड़ में विदेशी सैनिक और गुप्तचर उसकी सीमा पर जासूसी कर सकते हैं, जिससे नेपाल सरकार ने यह कदम उठाया है।
चीन को सता रहा जासूसी का डर
नेपाल सरकार ने आपदा के पहले दिन ही स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि वह किसी भी देश की रेस्क्यू टीम को इजाजत नहीं देगा। भारत ने तत्काल राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीम भेजने का प्रस्ताव रखा था, यह कहते हुए कि यदि आवश्यकता हुई तो बचाव और राहत कार्यों में मदद की जाएगी। हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत को साफ कह दिया कि ऐसी किसी भी रेस्क्यू टीम की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राहत सामग्री तो स्वीकार की जाएगी, लेकिन फिलहाल किसी भी देश की रेस्क्यू टीम को आने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
इस बड़े फैसले के पीछे चीन का लगातार बढ़ता दबाव एक प्रमुख कारण है। जिन नेपाली इलाकों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वे सीधे चीन की सीमा से सटे हुए हैं। तस्वीरों में यह भी सामने आया है कि नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाला केरूंग नाका पूरी तरह से तबाह हो चुका है और अब वहां अंतरराष्ट्रीय सीमा का कोई स्पष्ट निशान नहीं बचा है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब से यह हादसा हुआ है, चीनी दूतावास की तरफ से लगातार इस बात का दबाव दिया जा रहा है कि किसी भी देश की रेस्क्यू टीम को या रेस्क्यू टीम के नाम पर किसी देश की सेना को रसुवा के सीमावर्ती इलाकों में आने की इजाजत नहीं दी जाए।”
अमेरिका और पश्चिमी देशों से अधिक चिंता
चीन को डर है कि रेस्क्यू बल के नाम पर विदेशों से सैनिक और गुप्तचर आ सकते हैं, जो उसकी सीमा पर जासूसी या निगरानी गतिविधियां कर सकते हैं। एक नेपाली मंत्री ने भी नाम न बताने की शर्त पर हैरानी जताई कि जहां भारत सहित अन्य देश मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं, वहीं चीन पहले मिनट से ही केवल रसुवा की सीमा से सटे आसपास के इलाकों में किसी अन्य देश की रेस्क्यू टीम को घुसने न देने के लिए दबाव बना रहा है।
चीनी दूतावास और चीन के प्रशासन को आशंका है कि रेस्क्यू के बहाने अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की सेना और इंटेलिजेंस एजेंसी के लोग चीन के सीमा क्षेत्र में घुसपैठ कर सकते हैं। इसी संवेदनशीलता को समझते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से सीमा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को समझने का आग्रह भी किया है। यह स्थिति भारत और नेपाल के संबंधों में एक नई जटिलता पैदा कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब मानवीय सहायता की सबसे अधिक जरूरत है।
चीन की सीमा से सटे इलाकों पर खास नजर
नेपाल के जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वे चीन की सीमा से सटे हुए हैं। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाला केरूंग नाका पूरी तरह से तबाह हो चुका है और अब वहां कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा का निशान नहीं बचा है। चीन को आशंका है कि बचाव दल के नाम पर विदेशों से सैनिक और गुप्तचर आ सकते हैं, जो चीन की सीमा पर जासूसी या निगरानी गतिविधियां कर सकते हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया, ‘जब से यह हादसा हुआ है, चीनी दूतावास की तरफ से लगातार इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि किसी भी देश की रेस्क्यू टीम या रेस्क्यू टीम के नाम पर किसी देश की सेना को रसुवा के सीमावर्ती इलाकों में आने की इजाजत नहीं दी जाए।’
पश्चिमी देशों से चीन को ज्यादा चिंता
नाम न बताने की शर्त पर एक नेपाली मंत्री ने हैरानी जताई कि जहां भारत सहित अन्य देश आपदा में मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं, वहीं चीन पहले मिनट से ही सिर्फ रसुवा की सीमा से सटे इलाकों में किसी अन्य देश के रेस्क्यू टीम को घुसने नहीं देने के लिए दबाव बना रहा है। चीन को भारत से भी अधिक चिंता अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के रेस्क्यू टीम को लेकर है।
चीनी दूतावास और चीन के प्रशासन को लगता है कि बचाव के नाम पर इन देशों के सैन्य और खुफिया एजेंसी के लोग चीन के सीमा क्षेत्र में घुस सकते हैं। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति को समझने का आग्रह किया है। यह दिखाता है कि प्राकृतिक आपदा के बावजूद भू-राजनीतिक हित राहत कार्यों को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।







