Nepal Flash Flood: 26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने त्रिशूली नदी के किनारे बसे इलाकों में भयंकर तबाही मचाई है। तिब्बत सीमा से लेकर नारायणी नदी के संगम तक, लगभग 150 किलोमीटर का पूरा क्षेत्र अब ‘डेथ कॉरिडोर’ में बदल गया है। इस भयावह प्राकृतिक आपदा में अब तक 309 शव निकाले जा चुके हैं, वहीं 1500 से अधिक लोग मलबे में लापता बताए जा रहे हैं। अपनों को खोजने की आस में परिजन दर-दर भटक रहे हैं।
अपनों की तलाश में बदहवास परिजन, हर गुजरते पल के साथ टूट रही उम्मीदें
प्रभात खबर की टीम जब नेपाल के नुवाकोट स्थित बट्टार के ‘श्री नं. 1 सैन्य प्रशिक्षण केंद्र’ पहुंची, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। आसमान में लगातार गूँजते सैन्य हेलिकॉप्टरों की आवाज के बीच, नीचे जमीन पर सैकड़ों बदहवास आँखें किसी अपने की एक झलक पाने को तरस रही थीं। बाढ़ग्रस्त इलाकों से जैसे ही कोई हेलिकॉप्टर उतरता है, दर्जनों लाचार परिजन उसकी ओर भागते हैं। किसी के हाथ में बेटे की तस्वीर होती है, तो किसी की जुबान पर बस एक ही दुआ कि शायद उनका अपना सही सलामत लौट आया हो।
सविता अधिकारी, जिनके पति त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट में कार्यरत थे, बाढ़ के बाद से ही उनसे संपर्क टूट गया है। घंटों से टकटकी लगाए बैठी सविता कहती हैं, “संभव है मेरे पति सुरंग के भीतर सुरक्षित हों और इसी वजह से नेटवर्क न होने के कारण संपर्क नहीं हो पा रहा है। मुझे पूरा यकीन है कि सेना उन्हें जल्द बाहर निकाल लेगी।” वहीं, 74 वर्षीय पदम बहादुर कंडेल अपने रिश्तेदार खलप्रसाद की खोज में बिलख रहे हैं। सूर्यगढ़ी-5 निवासी उनका भांजा अपने 11 साथियों के साथ गोसाइकुंड ट्रेकिंग के लिए निकला था, जिसका अब कोई अता-पता नहीं है।
तादी से आए बासुदेव रिजाल अपने गोसाइकुंड गए भांजे के आखिरी शब्दों को याद कर बिलख पड़ते हैं। उन्होंने बताया, “उसने फोन पर कहा था, मामा बस बह गई है। हम एक घर की छत पर हैं… अगर मकान टिका रहा तो बच जायेंगे। अगले ही पल नदी का रेला पूरे मकान समेत उसे बहा ले गया और फोन कट गया।”
शवों की पहचान मुश्किल, अस्थाई केंद्र में लगी लंबी कतारें
चितवन के भरतपुर महानगर पालिका 10 में बनाए गए विशेष शव पहचान केंद्र के बाहर सन्नाटे को चीरती हुई एंबुलेंस की सायरन लगातार बजती रहती हैं। सामान्य शवगृहों की 50 शवों की क्षमता भर चुकी है, इसलिए यहां 250 शवों के लिए ड्राई आइस और डीप फ्रीजर का अस्थाई इंतजाम किया गया है।
चितवन की यमन बानू अपने परिवार के 14 लापता लोगों की तलाश में यहां पहुंची हैं। पालुंगटार से गए 39 तीर्थयात्रियों का भी अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। नारायणी नदी के किनारों से लगातार 25 एंबुलेंस शवों को लेकर पहुंच रही हैं, और परिजन हर कफन हटाकर अपनों का चेहरा तलाशने को मजबूर हैं, यह उम्मीद करते हुए कि शायद उनका अपना इनमें से कोई न हो। त्रासदी का यह सिलसिला अभी भी जारी है, और लापता लोगों की तलाश में बचाव कार्य लगातार चल रहा है।







