Patna Cyber Fraud: बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पटना साइबर थाने की पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के 10 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराते थे. अगमकुआं थाना क्षेत्र के शीतलानगर नहर रोड स्थित एक मकान में छापेमारी के दौरान इन आरोपियों को पकड़ा गया. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बैंक खातों से ठगी की रकम निकालकर कथित साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था और इसके बदले 20 प्रतिशत कमीशन लेता था.
पुलिस ने इस कार्रवाई में एक लैपटॉप, 2.86 लाख रुपये नकद, 38 स्मार्टफोन, 89 एटीएम कार्ड, 76 पासबुक, 82 चेकबुक और आठ सिम कार्ड बरामद किए हैं. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बिहार के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों के लोग शामिल हैं. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जो इस नेटवर्क की गंभीरता को दर्शाती है.
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मालसलामी निवासी राहुल कुमार, नई दिल्ली निवासी कुलदीप सिंह, जहानाबाद के इरकी निवासी राजू कुमार, खाजेकलां निवासी कन्हैया कुमार, लखनऊ निवासी शिशुपाल सिंह, खाजेकलां के कंगन घाट निवासी विष्णु कुमार, कोलकाता निवासी राहुल और सादिक आलम, शेखपुरा निवासी धनराज कुमार तथा खाजेकलां निवासी मो. माजीद के रूप में हुई है.
कैसे चलता था साइबर ठगी का यह गोरखधंधा?
जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह के सदस्य बिहार के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड से लोगों को पटना लाते थे. उन्हें नौकरी दिलाने या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने का झांसा दिया जाता था, जिसके बाद उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल किए जाते थे. पुलिस के मुताबिक, कुछ मामलों में तो आधार कार्ड पर पता बदलवाकर भी बैंक खाते खुलवाए गए थे, ताकि ठगी के नेटवर्क को मजबूती मिल सके.
बैंक खाते खुलवाने के बाद उनकी पूरी जानकारी जामताड़ा और अन्य जगहों पर सक्रिय साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी. खातों के एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक गिरोह के सदस्य अपने पास रखते थे. जैसे ही इन खातों में साइबर ठगी की रकम आती थी, उसे तुरंत निकालकर कथित सरगनाओं तक नकद पहुंचाया जाता था. इस पूरे काम के लिए गिरोह के सदस्यों को मोटी रकम कमीशन के तौर पर मिलती थी.
युवतियों और डिलीवरी बॉय की भूमिका
इस बड़े नेटवर्क में तीन युवतियां, सोनी कुमारी, प्रियंका कुमारी और सीमा भी कथित रूप से जुड़ी थीं. आरोप है कि वे लोगों को झांसे में फंसाकर बैंक तक लाने और खाते खुलवाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से मदद करती थीं. पुलिस अब उनकी भूमिका की गहराई से जांच कर रही है.
गिरोह का कथित सरगना राहुल कुमार था, जिस पर अमन नाम के एक डिलीवरी बॉय की मदद से बैंक की वेलकम किट हासिल करने का आरोप है. ब्लू डार्ट कूरियर से आने वाली वेलकम किट राहुल तक पहुंचाने के बदले अमन को 500 रुपये दिए जाते थे. पुलिस इस पहलू की भी बारीकी से जांच कर रही है कि कैसे कूरियर सेवा का इस्तेमाल इस ठगी के लिए किया जा रहा था.
जामताड़ा से जुड़े तार, सरगना का पुराना रिकॉर्ड
पुलिस की जांच में इस गिरोह के तार जामताड़ा के जुबैर और अल्ताफ से भी जुड़े होने की बात सामने आई है. बताया गया है कि उन्हीं के निर्देश पर यह गिरोह बैंक खाते उपलब्ध कराता था. एक चौंकाने वाले खुलासे में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक बरामद खाते से जुड़ी 341 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिली हैं. इन शिकायतों की प्रकृति और खाते से उनका संबंध अब जांच का अहम विषय है.
गिरोह का कथित सरगना राहुल कुमार पहले भी जेल जा चुका है. उसे हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया था. जेल में ही उसकी मुलाकात दिल्ली निवासी कुलदीप सिंह से हुई थी. जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर साइबर ठगी के लिए बैंक खाते जुटाने का यह बड़ा नेटवर्क तैयार किया. कुलदीप ने अगमकुआं इलाके में एक फ्लैट किराए पर लिया था, जहां से इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा था. पुलिस अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.







