पटना के ज्ञान भवन में गुरुवार को प्रशांत किशोर का प्रेस कॉन्फ्रेंस क्या हुआ, बिहार की राजनीति एकबारगी बदल गई। लगा, जैसे कोई तोप का गोला अचानक से दग गया और उससे कई छर्रे एकबारगी उड़कर बिहार के योद्धा राजनीति के धुरंधरों के सीने में एक के बाद एक तीर बनकर चुभने लगा। इससे लालटेन को बुझने का खतरा दिखा तो कमल के मुरझाने का भी। तीर को पीके की भाषा पसंद नहीं आई। विकास नहीं हुआ…कि बात पची नहीं। सो, राजनीति तेज हो गई। हां, किसी को अगर पीके अच्छे लगे तो वह उनका जाप शुरू कर दिया तो उनकी खुशामदगी में चिराग जलाए बैठ भी गए।
पीके ने कहा,आज भी बिहार सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य है। विकास के ज्यादातर मानकों में बिहार सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। यह मेरा नहीं, बल्कि नीति आयोग का आकलन है। उन्होंने लालू प्रसाद और उनके समर्थकों की बात की और कहा, उनका मानना है कि पहले 15 साल सामाजिक न्याय की बात हुई। सामाजिक रूप से पिछड़े लोग को उनकी सरकार ने आवाज दी।
इसके बाद के 15 साल में नीतीश कुमार और उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने सामाजिक पहलुओं पर ध्यान दिया है और बिहार का विकास किया है। दोनों ही बातों में कुछ सच्चाई जरूर है। लेकिन, बिहार आज 30 वर्ष के दोनों के राज के बाद भी पिछड़ा बना हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त है। रोजगार के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। अब एक तरफ नीतीश सामने हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी। पढ़िए किसने पीके को क्या कहा
वैसे तो भाजपा के कई नेता पीके को बहुत कुछ इन एक दिन में कह चुके हैं लेकिन बड़ा हमला प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जयसवाल की ओर से हुआ है उन्होंने प्रशांत किशोर को राजनीतिक धंधेबाज करार दिया है। कहा, जो आदमी कल तक राजनीतिक धंधा करता था राजनीति में आ रहा है।
लालू पर पीके के बहाने कटाक्ष करते जायसवाल ने कहा, 90 के दशक के पहले कांग्रेस के नेता बूथ लूटने का काम करते थे लेकिन बाद में बूथ लूटने वाले गुंडे ही राजनीति में आ गए। 90 के दशक में तो लालू के शासनकाल में तो हद ही हो गया, जब गुंडे–मवाली विधायक और सांसद बन गए। साल 2000 तक पहुंचते-पहुंचते जाति के नाम पर समाज सेवा करने वाले लोग राजनीति में आने और राजनीतिक धंधेबाज राजनीति में आ रहे हैं।
वहीं, रही-सही कसर खुद सीएम नीतीश कुमार ने पूरी कर दी। श्री कुमार ने कहा, ‘कौन क्या बोलता है इसका महत्व नहीं है। महत्व सत्य का है। बिहार में बहुत काम हुआ है, यह सब लोग जानते है।’ बिहार में बहुत काम हुआ है और लोग इस बात को जानते हैं।







