RK Sinha Death: भाजपा के दिग्गज नेता और SIS के जनक आरके सिन्हा का निधन, 75 की उम्र में ली अंतिम सांस!
RK Sinha Death: जनसंघ और बीजेपी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा अब नहीं रहे। उनके निधन से राजनीतिक और व्यावसायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
RK Sinha Death: भाजपा के दिग्गज नेता और SIS के जनक आरके सिन्हा का निधन, 75 की उम्र में ली अंतिम सांस!
RK Sinha Death: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्यों में से एक और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का निधन हो गया है।
“फर्श से अर्श तक का सफर तय करने वाले एक पत्रकार, एक उद्योगपति और एक राजनेता आर.के. सिन्हा अब नहीं रहे ..! देशज टाइम्स की श्रद्धांजलि
लगभग 75 साल की उम्र में उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को हुई इस दुखद घटना से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, आरके सिन्हा का पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना स्थित अन्नपूर्णा भवन, पाटलिपुत्र लाया जाएगा, जहां अंतिम दर्शनों के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। आरके सिन्हा ने अंतरराष्ट्रीय सिक्योरिटी एजेंसी एसआईएस (SIS) की भी स्थापना की थी और वे एक जाने-माने पत्रकार भी थे। उनके निधन से देश के राजनीतिक और व्यावसायिक जगत को बड़ी क्षति हुई है।
भाजपा और जनसंघ के निर्माण में अहम भूमिका
आरके सिन्हा का राजनीतिक सफर बेहद महत्वपूर्ण रहा है। वे 2014 से 2020 के बीच राज्यसभा के सदस्य रहे। जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में उनकी सक्रिय भूमिका थी। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के वे बेहद करीबी माने जाते थे। उनके बेटे ऋतुराज सिन्हा भी भाजपा के एक प्रमुख नेता हैं। आरके सिन्हा एक सफल व्यवसायी के तौर पर भी जाने जाते थे, जिन्होंने अपनी मेहनत से एक बड़ा मुकाम हासिल किया था।
आरके सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर जिले के बहियारा गांव में हुआ था, जो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सटा हुआ है। उन्होंने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की थी और कांग्रेस सरकार के दौरान पत्रकारिता का पेशा चुना। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी नौकरी चली गई थी, लेकिन इसी दौरान उनकी पहचान बिहार रेजिमेंट के सैनिकों से हुई, जिन्होंने युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसी दौर में उनकी मुलाकात जय प्रकाश नारायण (जेपी) से हुई, जिन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे ऐसा काम शुरू करें जिससे उन्हें खुद के साथ-साथ रिटायर होने वाले अनुशासित सैनिकों को भी आजीविका का मौका मिल सके। जेपी की इस प्रेरणा से ही उन्होंने सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) नामक संस्था की स्थापना की। यह संस्था 1947 में पटना में मात्र दो कमरों के एक छोटे से ऑफिस से शुरू हुई थी और आज भारत के बाहर कई अन्य देशों में भी इसका विस्तार हो चुका है। उनकी पत्नी का नाम रीता किशोर सिन्हा है।
बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, ‘जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व राज्यसभा सांसद आदरणीय श्री आर. के. सिन्हा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं मर्माहत करने वाला है। उनका स्नेह, अनुभव और मार्गदर्शन सदैव संगठन के कार्यों में मिलता रहा। संगठन के प्रति उनका समर्पण, विचारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनका प्रेरणादायी व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।’
आरके सिन्हा के निधन से बिहार की राजनीति और भाजपा संगठन में एक खालीपन आ गया है। उनका जीवन एक पत्रकार, व्यवसायी और समर्पित राजनेता के रूप में प्रेरणादायक रहा है। उनका अंतिम संस्कार पटना में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।